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आसियान देशों के ऑनलाइन सम्मेलन में चालबाज पड़ोसी ने बदले सुर

आसियान देशों के ऑनलाइन सम्मेलन में चालबाज पड़ोसी ने बदले सुर

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्ते के बारे में हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले चालबाज चीन ने दक्षिण पूर्व एशिया को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर शायद ही कोई भरोसा करे। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चल रहे टकराव के बीच कहा कि उनका देश दक्षिण पूर्व एशिया पर प्रभुत्व हासिल नहीं करेगा और न ही अपने छोटे पड़ोसियों के साथ दबंगई करेगा।


आपको बता दें, चिनफिंग ने सोमवार को दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के सदस्यों के साथ एक आनलाइन सम्मेलन के दौरान ये बातें कहीं। यह सम्मेलन दोनों पक्षों के बीच संबंधों की 30वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।


चिनफिंग के हवाले से देश की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा, 'चीन प्रभुत्ववाद व सत्ता की राजनीति का दृढ़ता से विरोध करता है। हम अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और क्षेत्र में स्थायी शांति बनाए रखना चाहते हैं।' शी ने यह टिप्पणी चीनी तट रक्षक पोतों द्वारा विवादित दक्षिण चीन सागर तट पर सैनिकों को आपूर्ति करने वाली दो फिलीपीनी नौकाओं को रोकने और उनपर पानी की तेज बौछार करने के कुछ दिनों बाद की है। 


दक्षिण चीन सागर पर आसियान सदस्य मलेशिया, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस भी दावा करते हैं।फिलीपींस ने चीन को दिखाया आईना :फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने चीनी तट रक्षकों द्वारा अपने देश की नौकाओं को रोके जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चीन को वर्ष 1982 के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के समुद्री कानून संबंधी निष्कर्षो और वर्ष 2016 के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा दक्षिण चीन सागर को लेकर सुनाए गए फैसले को याद रखना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावों को खारिज कर दिया था। 


मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब ने दक्षिण चीन सागर के विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाने की अपील की। उधर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संवाददाता सम्मेलन में वर्ष 2016 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को नहीं स्वीकार करने की बात दोहराई। म्यांमार को प्रतिनिधित्व नहीं : दो राजनयिकों ने बताया कि सम्मेलन में आसियान सदस्य म्यांमार को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, क्योंकि वहां की सैन्य सरकार ने संगठन के प्रतिनिधियों को अपदस्थ नेता आंग सान सू की व अन्य से मिलने की इजाजत नहीं दी थी। 


चीन ने सभी 10 सदस्यों के सम्मेलन में प्रतिभाग करने की इच्छा जताई थी, लेकिन समूह के मौजूदा अध्यक्ष ब्रुनेई ने म्यांमार पर आपत्ति जता दी।