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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट को मिली पहली महिला जज

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट को मिली पहली महिला जज

जनवरी 24 का दिन पाकिस्तान में ऐतिहासिक दिन बन गया है। यहां सुप्रीम कोर्ट को पहली महिला जज 24 जनवरी 2022 को मिल गई है। सोमवार को पहली महिला जज आयशा मलिक ने अपने पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद वो सुप्रीम कोर्ट में काम करेंगी।


गौरतलब है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर की जाती है, लेकिन मलिक के नाम की सिफारिश में इस क्रम को खारिज कर अनुमति दी गई। उनकी नियुक्ति वाली कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यह निर्णय देश हित में लिया गया है। 


2031 में होंगी रिटायर 


आयशा मलिक को मार्च 2012 में लाहौर हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। वह अब जून 2031 में अपनी सेवानिवृत्ति तक सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर पर सेवाएं देंगी। 2030 में वह चीफ जस्टिस बनने की वरिष्ठता हासिल कर लेंगी। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय में सेवा की वरिष्ठता के आधार पर की जाती है।


शुक्रवार को जारी हुआ था नोटिफिकेशन


पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद आयशा मलिक की पदोन्नति को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने मंजूरी दे दी थी। इस नोटिफिकेशन में कहा गया था कि पाकिस्तान के इस्लामी गणराज्य के संविधान के आर्टिकल- 177 के क्लॉज (1) के तहत राष्ट्रपति को लाहौर हाईकोर्ट की न्यायाधीश आयशा ए. मलिक को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करते हुए प्रसन्नता हो रही है।


वरिष्ठता क्रम को खारिज कर दी नियुक्ति


इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के न्यायिक आयोग (जेसीपी) द्वारा नामांकन भेजा गया था। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनेटर फारूक एच नाइक की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने उनके नामांकन को मंजूरी देते हुए सीनियरिटी के सिद्धांत को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आयशा मलिक लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सीनियरिटी सूची में चौथे स्थान पर थीं।


पिछले साल खारिज हुआ था नाम


पाकितस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनेटर फारूक नाइक ने कहा - हमने राष्ट्रहित में जस्टिस आयशा के नाम को मंजूरी दी है। पिछले साल आयशा मलिक का नाम खारिज कर दिया गया था। यह वरिष्ठता क्रम की वजह से हुआ था। इस साल 6 जनवरी को हुई जेसीपी की बैठक में भी मलिक के नामांकन का जोरदार विरोध हुआ था। हालांकि चार के मुकाबले पांच सदस्यों ने मलिक का समर्थन किया था।