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ओडिशा: सरकार ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों को ड्यूटी पर वापिस आने को कहा

ओडिशा में 50,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के हड़ताल के चलते, राज्य सरकार ने लगभग 130,000 आंदोलनकारी शिक्षकों को उनके कर्तव्यों पर लौटने का निर्देश दिया। हड़ताल 8 सितंबर से शुरू हुई थी।

विरोध और दलीलें:

 

1.  शिक्षकों का विरोध:

शिक्षक संविदा नियुक्ति व्यवस्था को समाप्त करने, ग्रेड पे बढ़ोतरी करने और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

3.  आंदोलनकारी शिक्षकों की विरोधी तैयारी:

बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शिक्षक संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना बीईओ कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे ‘माना जाता है’ गंभीर कदाचार माना जा रहा है।

सरकार का पक्ष:

1. शैक्षणिक सत्र की बजाय:

शैक्षणिक सत्र में 220 कार्य दिवस होंगे और यदि नियमित कार्य महीनों के दौरान यह लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो इसे बाद की अवधि के दौरान पूरा किया जाना चाहिए।

2. उपसमिति का गठन:

पदाधिकारियों की उपस्थिति में शिक्षक संघ की मांगों की जांच और चर्चा के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में एक उप-समिति का गठन किया गया है।

3 . निर्णय की प्रतीक्षा:

शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद, समिति उनकी मांगों पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति को अपने निर्णय की सिफारिश करेगी।

4. शिक्षकों का संकल्प:

शिक्षक ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।

निष्कर्ष:

राज्य सरकार के औपचारिक आदेश के बावजूद, शिक्षकों ने अपना विरोध समाप्त करने से इनकार कर दिया है और उनकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का आलंब बनाया है।

FAQs:

शिक्षक संघ क्या मांग रहा है?

शिक्षक संघ विभिन्न मांगों को उठा रहा है, जैसे संविदा नियुक्ति व्यवस्था को समाप्त करने, ग्रेड पे बढ़ोतरी, और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग कर रहा है।

शिक्षकों का हड़ताल जारी रखने का मुख्य कारण क्या है?

शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से सम्मान्य चर्चा करने के बावजूद, उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं और इसलिए उन्होंने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया।

आंदोलनकारी शिक्षकों ने अपने विरोध को कैसे अभिव्यक्त किया है?

बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शिक्षक अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना बीईओ कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे ‘माना जाता है’ गंभीर कदाचार माना जा रहा है।

क्या सरकार शिक्षकों की मांगों पर विचार करेगी और उन्हें स्वीकृति देगी?

शिक्षक संघ की मांगों की जांच और चर्चा के लिए एक उप-समिति का गठन किया गया है। यह समिति सरकार को शिक्षकों की मांगों पर विचार करने और उन्हें स्वीकृति देने के लिए सिफारिश करेगी।

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