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पाकिस्तान एक बार फिर विश्व के सामने हुआ शर्मसार

इस्लामाबाद : पाकिस्तान की इस समय पूरी दुनिया में फजीहत हो रही है जिसकी वजह बाहर के मुल्को में भीख माँगना। इसी बीच में पाकिस्तान से सऊदी अरब भीख मांगने जा रहे 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक बच्चा और 11 महिलाएं हैं। ये सभी तीर्थयात्रियों को मिलने वाले वीजा (उमरा वीजा) का फायदा उठा रहे थे। फेडरल इंवेस्टिगेशन एजेंसी ने इन लोगों को पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान इन लोगों ने बताया कि भीख में मिलने वाली रकम का 50% हिस्सा ट्रैवल एजेंट्स ले लेते हैं। ओवरसीज अधिकारियों की मीटिंग में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से हज का कोटा देने में सावधानी बरतने को कहा है। सऊदी के अधिकारियों ने पाकिस्तान से भिखारियों और जेबकतरों को न भेजने के लिए कहा। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने कहा कि उनकी जेल ऐसे लोगों से भर चुकी है।

याद रहे कि आज ही पाकिस्तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में गिरफ्तार होने वाले भिखारियों में से 90% लोग पाकिस्तानी मूल के होते हैं। दरअसल, प्रवासी पाकिस्तानियों पर सीनेट की स्टैंडिंग कमेटी को 27 सितंबर को बताया गया कि पाकिस्तान से बड़ी संख्या में भिखारी विदेश जा रहे हैं। इससे मानव तस्करी को बढ़ावा मिला है। ओवरसीज मिनिस्ट्री सेक्रेटरी जुल्फिकार हैदर ने कमेटी को बताया कि कई भिखारियों ने सऊदी अरब, ईरान और इराक जाने के लिए तीर्थयात्रियों को मिलने वाले वीजा का फायदा उठाया है। उन्होंने कहा कि हरम जैसी पवित्र जगहों पर बड़ी संख्या में जेबकतरों को गिरफ्तार किया गया। बाद में इनकी पहचान पाकिस्तानी नागरिकों के रूप में हुई। हैदर ने कहा कि इस वक्त पाकिस्तान में करीब 50 हजार इंजीनियर बेरोजगार हैं।

अभी कुछ दिन पहले ही विश्व बैंक ने कहा था कि 2022 में गरीबी 34.2% थी, जो 5% बढ़कर अब 39.4% हो गई है। वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी थी कि एक साल में 1.25 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे (BPL) आए हैं। इसके बाद BPL आबादी 9.5 करोड़ हो गई है। हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। विश्व बैंक के एक अधिकारी ने कहा था- पाकिस्तान का इकोनॉमिक मॉडल गरीबी कम नहीं कर पा रहा है। समकक्ष देशों से यहां लिविंग स्टैंडर्ड भी गिरता जा रहा है। वर्ल्ड बैंक ने इसका उपाय ये बताया था कि टैक्स-टु-GDP रेश्यो में तुरंत 5% की ग्रोथ और एक्सपेंडिचर्स यानी व्यय में GDP के लगभग 2.7% की कटौती की जानी चाहिए। इससे अस्थिर अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाया जा सकता है।

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