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पाकिस्तान के मंत्री ने चीन को लेकर किया खुलासा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान अभी तक के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है वहां के हालात बेकाबू होते जा रहे है और जनता सड़कों पर है। पाकिस्तान की आर्थिक स्तिथि बहुत ही ख़राब हो गई है और आना वाला समय पाकिस्तान के लिए सही नही लग रहा है। आपको बता दे कि पाकिस्तान एक बार फिर दिवालिया होने से बच गया है। पाकिस्तान के अखबार ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंस मिनिस्टर भले ही सऊदी अरब और चीन से नए लोन मिलने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत कुछ और है। नवंबर 2022 में में दोनों देशों से बातचीत हुई थी और अब तक इनकी तरफ से कोई पैसा मिलना तो दूर, वादा भी नहीं किया गया। चीन तो एक कदम आगे निकल गया। उसने पाकिस्तान से 1.3 अरब डॉलर की किश्त मांग ली थी। पाकिस्तान सरकार ने चीन की इस हरकत पर कुछ नहीं कहा है।

बता दे कि कल ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को स्टाफ लेवल एग्रीमेंट के तहत 3 अरब डॉलर का कर्ज देने का फैसला किया है। IMF और पाकिस्तान की सरकार के बीच 9 महीने का स्टैंडबाय अरेंजमेंट हुआ है। हालांकि, अभी इसे IMF के एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी मिलना बाकी है। पाकिस्तान के लिए IMF के मिशन प्रमुख नाथन पोर्टर ने कहा- मुझे ये ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि IMF का पाकिस्तानी अथॉरिटी के साथ उसके IMF कोटे के 111 फीसदी यानी 3 बिलियन डॉलर के लिए 9 महीने के स्टैंडबाय एरेंजमेंट के तहत स्टॉफ-लेवल एग्रीमेंट हो गया है।

पाकिस्तान और IMF के बीच 6.5 अरब डॉलर के कर्ज पर 2019 में सहमति बनी थी। इसकी दो किश्तें पाकिस्तान को मिल चुकी हैं। तीसरी किश्त पर मंजूरी के लिए 30 जून यानी आज आखिरी दिन था। अगर आज भी IMF के साथ समझौता नहीं होता तो ये प्रोग्राम ही एक्सपायर हो जाता। जियो न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तान को 3 बिलियन डॉलर का राहत पैकेज उसके उम्मीद से ज्यादा है। 2019 में हुए समझौते के आधार पर उसे 2.5 बिलियन डॉलर मिलने का इंतजार था। IMF के बोर्ड की तरफ से इस समझौते पर मिड-जुलाई में फैसला आने की उम्मीद है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने डील होने के बाद ट्वीट करते हुए अल्हम्दुलिल्लाह लिखा।

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा कि इससे पहले 9 जून को पाकिस्तान सरकार ने 50.45 बिलियन डॉलर का बजट पेश किया था। पाकिस्तानी सरकार ने वित्त वर्ष 2024 के लिए कुल एक्सपेंडिचर (खर्च) 13.32 लाख करोड़ रुपए रखा था। इसका 55% हिस्सा कर्ज और उसकी ब्याज चुकाने में खर्च होगा। यानी करीब 7.3 लाख करोड़ रुपए कर्ज चुकाने में ही चले जाएंगे। सरकार ने अगले साल महंगाई दर 21% से कम रखने का टारगेट रखा है। मंत्री इशाक डार ने बताया था कि नए बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। हालांकि, सरकार के इस फैसले से IMF नाराज हो गया था।

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