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जादवपुर विश्वविद्यालय की कमियों की पहचान करने के लिए पैनल गठित

भारत में शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से में विश्वविद्यालयों का महत्व होता है। ये संस्थान न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे का सशक्त और कुशल होना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक खामियों की खोज

विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे में होने वाली कमियों की पहचान और उनके सुधार के लिए पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने जादवपुर विश्वविद्यालय में एक समिति का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य प्रशासनिक खामियों और बुनियादी ढांचे की कमियों को पहचानना और उन्हें सुधारने के उपाय तय करना है।

समिति की संरचना

यह समिति में पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और उच्च शिक्षा विभाग के विशेष आयुक्त (विश्वविद्यालय शाखा) होंगे। साथ ही, सार्वजनिक शिक्षा निदेशक और पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव सदस्य के तौर पर शामिल होंगे। उच्च शिक्षा परिषद के सदस्य सचिव समिति के संयोजक के रूप में कार्य करेंगे।

रैगिंग के दुखद परिणाम

यह समिति कड़े शब्दों में स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर गंभीरता से ध्यान देने का काम कर रही है। इस घटना ने रैगिंग की कठिनाइयों को एक बार फिर से सामने लाया है और उसके परिणामस्वरूप एक छात्र की मौत हो गई है।

सुधार के उपाय

इस घातक घटना के बाद, पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने त्वरित कदम उठाए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने गुरुवार को जारी एक आदेश में यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खामियों और बुनियादी ढांचे की कमियों के बारे में राज्य सरकार को सूचित किया जाए।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की गठन

उच्च शिक्षा परिषद ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का काम दो सप्ताह के अंदर उनकी रिपोर्ट तैयार करके उच्च शिक्षा विभाग को सौंपना है।

सीसीटीवी कैमरा की अभाव

एक अधिकारी ने बताया कि घटना के समय हॉस्टल में कोई सीसीटीवी कैमरा स्थापित नहीं था, जिससे घटना का पूरा परिणाम नहीं जाना जा सकता। इस बात की जांच करने के लिए पुलिस ने छात्रावास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मांग की है, जिससे कि रैगिंग की गई थी या नहीं, यह जांचा जा सके।

यूजीसी के एंटी-रैगिंग मानदंड

2009 में जारी यूजीसी के एंटी-रैगिंग मानदंड छात्रावासों में प्रथम वर्ष के छात्रों को अलग करने की परिक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं। यह उन छात्रों की सुरक्षा और उनके अध्ययन को महत्वपूर्णता देता है।

सुधार की दिशा में कदम

जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रशासन द्वारा प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ रैगिंग की गई थी, इसका समाधान तलाशने के लिए समिति जेयू से सहायता लेगी। यह सुनिश्चित करने के लिए हो सकता है कि नए छात्रों को छात्रावास में अलग रखने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।

समापन

इस घातक घटना ने स्पष्ट कर दिखाया है कि प्रशासनिक खामियों की कमियों की खोज और उनके सुधार की आवश्यकता है। समिति ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि इस तरह की घटनाएं फिर से नहीं हो सकें।

समिति का उद्देश्य क्या है?

समिति का उद्देश्य जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खामियों और बुनियादी ढांचे की कमियों को पहचानना और उन्हें सुधारने के उपाय तय करना है।

समिति में कौन शामिल है?

समिति में पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष आयुक्त (विश्वविद्यालय शाखा), सार्वजनिक शिक्षा निदेशक और पश्चिम बंगाल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव शामिल हैं। समिति के सदस्य सचिव समिति के संयोजक के रूप में कार्य करेंगे।

समिति ने क्या कदम उठाए हैं?

समिति ने जादवपुर विश्वविद्यालय को एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन करने का आदेश दिया है. समिति ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि नए छात्रों को छात्रावास में अलग रखने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।

समिति के काम के क्या परिणाम हो सकते हैं?

समिति के काम के परिणामस्वरूप जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खामियों और बुनियादी ढांचे की कमियों को पहचाना जा सकता है और उन्हें सुधारा जा सकता है। इससे विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण बन सकता है।

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