मनोरंजनहास्य

खुशी का ठिकाना

टीचर बच्चो से – सबसे ज्यादा नशा किसमें होता है ?
मिंटू – किताब में।
टीचर – कैसे ?
मिंटू – क्योंकि किताब खोलते ही नींद आ जाती है।

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संता बंता से – क्या तुम चीनी भाषा पढ़ कर सुना सकते हो ?
बंता – हां, लेकिन तभी जब वह हिंदी या अंग्रेजी में लिखी हुई हो।

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प्रिंसिपल – बताओ, कुतुब मीनार कहां है ?
बंटी – पता नहीं।
प्रिंसिपल – फिर बेंच पर खड़े हो जाओ।
बंटी बेंच पर खड़ा हो जाता है और कुछ देर बाद कहता है,
प्रिंसिपल साहब यहां से भी नहीं दिख रहा है।

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पापा अपने बेटे से – तुम्हें पुदीना लाने के लिए कहा था, तुम धनिया क्यों ले आये हो।
तुम जैसे बेवकूफ को तो घर से निकाल देना चाहिए।
बेटा – पापा चलो हम दोनों ही घर से निकल जाते हैं, क्योंकि मम्मी कह रही थी यह मेथी है।

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टीचर – “खुशी का ठिकाना न रहा” कोई इस मुहावरे का अर्थ बताओ ?
गजोधर – खुशी घर वालों से छिपकर, हर रोज अपने दोस्त से मिलने जाती थी।
फिर एक दिन उसके पापा ने उसे देख लिया और खुशी को घर से निकाल दिया।
अब बेचारी “खुशी का ठिकाना न रहा”।
यह सुनकर टीचर अभी तक बेहोश हैं।

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मास्टर जी – बच्चो खाना खाने से पहले सभी को अपने हाथ धोने चाहिए।
शरारती बच्चा – लेकिन, मैं तो खाना खाने के बाद हाथ धोता हूँ।
मास्टर जी- ऐसा क्यों?
शरारती बच्चा – ताकि मोबाइल पर दाग न पड़ जाए।

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