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देशभर में लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, पौष की धूम, राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली: देशभर में आज धूमधाम से मनाया जा रहा है लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पौष का पर्व। इस शुभ अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ( President Ram Nath Kovind ) ने देशवासियों को इन सभी त्यौहारों की शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पौष पर्व की सभी को बधाई। हमारे देश को परिभाषित करने वाली विविधता में एकता पर प्रकाश डालते हुए, ये त्यौहार प्रकृति के साथ हमारे जैविक संबंधों को रेखांकित करते हैं। त्योहार सभी के लिए समृद्धि और खुशियां लेकर आए।

मकर संक्रांति ( Makar Sankranti )देश का मुख्य पर्व है। पौष ( Paush )मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्यौहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।

तमिलनाडु में इसे पोंगल ( Pongal ) नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रांति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण ( Uttarayan ) भी कहते हैं।

Pongal

मकर संक्रांति के दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिये भगवान को धन्यवाद देकर अपनी कृपा को सदैव लोगों पर बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं। इसलिए मकर संक्रांति के त्यौहार को फसलों एवं किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है।

असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू या भोगली-बिहू ( Bhogali Bihu ) के नाम से मनाते हैं।

magh bihu

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान और गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

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