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फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के रेडियोएक्टिव पानी का समुद्र में छोड़ा जाना: जापान की नई पहल

जापान ने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के रेडियोएक्टिव पानी को समुद्र में छोड़ने की प्रक्रिया की शुरुआत की है। इस पहल के पीछे की वजह और इसके असर की चर्चा यहाँ है।

पहले दिन की योजना:

पहले दिन के मुताबिक, लगभग 2 लाख लीटर पानी को समुद्र में छोड़ा जाएगा, जिसके बाद इसे बढ़ाकर 4.60 लाख लीटर किया जाएगा। यह पानी प्लांट के मेंटेनेंस कंपनी TEPCO के द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

प्रक्रिया और सुरक्षा:

रेडियोएक्टिव पानी को समुद्र में छोड़ने के पहले, सुरक्षा की मानदंडों की जांच की गई है और सैंपल के तौर पर शुरुआती टैंक से थोड़ा पानी छोड़ा गया। यह प्रक्रिया अविरुद्ध है और किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं दिखा। पानी को समुद्र में रिलीज करने के लिए एक पंप 24 घंटे चालित रहेगा।

2011 के आपदा के बाद:

2011 में भूकंप और सुनामी की वजह से फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट में विस्फोट हुआ था। उसके बाद से 133 करोड़ लीटर रेडियोएक्टिव पानी जमा हो गए हैं। अब जापान इस पानी को समुद्र में बहा रहा है।

असर और चुनौतियाँ:

रेडियोएक्टिव पानी का समुद्र में छोड़ने से चीन और दक्षिण कोरिया में चिंता है। यह प्रदूषण समुद्री जीवों और मानव स्वास्थ्य पर क्या असर डालेगा, यह अभी तक निश्चित नहीं है।

UN की मंजूरी:

UN की एटॉमिक एजेंसी IAEA ने समुद्र में रेडियोएक्टिव पानी को छोड़ने की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। इसे ALPS प्रोसेस के माध्यम से पूरा किया जाएगा और इसका असर कम होने का प्रयास किया जा रहा है।

निष्कर्ष:

रेडियोएक्टिव पानी को समुद्र में छोड़ने की पहल ने पार्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए जापान को उत्तरदायित्व दिखाया है। कैसे यह प्रयास समुद्री जीवों और मानव स्वास्थ्य पर असर डालेगा, यह विशेषज्ञों की जांच की जानी चाहिए।

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