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राजा जयचंद्र किला कन्नौज जनपद का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद में स्थित प्राचीन किला एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर प्राचीन किले के अवशेष आज भी देख जा सकते हैं, जिसे आम तौर पर राजा जयचंद्र किला के नाम से भी जाना जाता है। यहां राजा जयचंद्र की प्रतिमा भी स्थापित है।

वर्तमान में, राजा जयचंद्र का यह किला एक बड़े से टीले में परिवर्तित हो गया है। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के दिन, राजा जयचंद्र की याद में यहां एक कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से इतिहासकार और प्रबुद्धजन भाग लेते हैं।

राजा जयचंद्र के पिता विजयचंद्र ने जीवित रहते ही अपने पुत्र को कन्नौज का राज-काज सौंपा दिया था। विजयचंद्र की मृत्यु के पश्चात जयचंद्र को कन्नौज का राजा बनाया गया। राजा जयचंद्र वीरता, साहस, कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता के प्रतीक थे और उन्होंने कन्नौज राज्य को विस्तारित किया। उनकी राजशक्ति इतनी विशाल थी कि उन्होंने चीन से लेकर मालवा तक कई क्षेत्रों में शासन किया।

राजा जयचंद के एक पुत्र हरिश्चंद्र और संयोगिता नामक एक पुत्री भी थी। पुत्री संयोगिता के कारण पृथ्वीराज चौहान और राजा जयचंद के बीच युद्ध हुआ था। राजा पृथ्वीराज ने संयोगिता से प्रेम विवाह किया था, जिससे राजा जयचंद का विरोध हुआ था।

राजा जयचंद की कुछ अद्भुत रचनाएँ भी थीं, जिसमें “रंभामंजरी नाटिका” विख्यात है। यह नाटिका उनकी विजय गाथा का वर्णन करती है। उन्होंने गहडवाल तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया था और भारत को विदेशी आक्रांता शहाबुद्दीन गोरी से बचाया और उसे कई बार हराया था। राजा जयचंद के संबंध में कई प्रसिद्ध इतिहासकारों ने अपनी रचनाओं में इसका वर्णन किया है।

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