उत्तर प्रदेश / यूपीराज्य

भोग विलास त्याग करना ही तपस्या है – स्वामी मुक्तिनाथानंद जी

पस्या शारीरिक, वाचिक एवं मानसिक रूप से करना चाहिए-स्वामी जी

रविवार के प्रातः कालीन सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद जी ने बताया कि ईश्वर लाभ हेतु भक्ति अर्जन करने के लिए तपस्या एक महत्वपूर्ण साधन है एवं भोग विलास त्याग करना ही तपस्या है।
स्वामी जी ने बताया कि तपस्या शारीरिक वाचिक एवं मानसिक रूप से करना चाहिए एवं वह तपस्या सात्विक भी होनी चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा – देवता, ब्राह्मण, गुरुजन और महापुरुषों का पूजन करना, शुद्धि रखना, सरलता और ब्रह्मचर्य का पालन करना तथा हिंसा न करना ही शारीरिक तपस्या है।

इसके साथ-साथ किसी को भी परेशान न करने वाला सत्य और प्रिय तथा हितकारक भाषण बोलना एवं स्वाध्याय और अभ्यास तथा नाम जप आदि वाणी संबंधी तपस्या है तथा मन की प्रसन्नता, सौम्यभाव, मननशीलता, मन का निग्रह और भावों की शुद्धि कर लेना ही मानसिक तपस्या कहलाता है।

यह तीनों प्रकार की तपस्या अगर परम श्रद्धा से, फलेच्छारहित होकर किया जाए तब वह सात्विक तप होता है एवं हमारे मोक्ष प्राप्ति का कारण बनता है लेकिन वो तपस्या अगर सात्विक न हो अर्थात राजसिक और तामसिक हो तब वो व्यर्थ हो जाता है और हमें भक्ति नहीं प्राप्त नहीं होती है।

इसको विस्तार करते हुए श्रीकृष्ण ने कहा जो तप सत्कार, मान और पूजा के लिए अर्थात दिखाने के भाव से किया जाता है वह इस लोक में अनिश्चित और नाशवान फल देने वाला है और यह राजस तप ईश्वर तक ले जाने में असमर्थ है वैसे ही जो तप मूढ़तापूर्वक, हठ से, अपने को पीड़ा देकर अथवा दूसरों को कष्ट देने के लिए किया जाता है वह तप तामस तप कहा जाता है एवं वह वर्जनीय है।

अर्थात ईश्वर प्राप्ति के लिए एवं शुद्धाभक्ति अर्जन करने के लिए शरीर, मन और वाणी को सर्वदा नियंत्रण में रखना चाहिए ताकि हमारा मन भोग विलास के प्रति आकृष्ट न हो एवं ईश्वर के प्रति आकर्षण बढ़े तथा ईश्वर अभिमुखी जीवन में यथासंभव भोग विलास वर्जन करते हुए मन ईश्वर के चरणों में शरणागत होकर रहे।

स्वामी मुक्तिनाथानंद जी ने कहा हमें श्री भगवान के चरणों में निरंतर प्रार्थना करना चाहिए कि इस दुर्लभ मनुष्य जीवन को प्राप्त करने के उपरांत भोग विलास आदि नाशवान एवं अनित्य रुचि को छोड़कर ईश्वर को प्राप्त करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे ताकि हम इस जीवन में ही ईश्वर प्राप्त करके जीवन सार्थक कर सकें।

 

read more… आज के लेख में हम शंख और उसके महत्व के बारे में जानते है

 

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