अंतरिक्ष से आ रहा एस्टेरॉयड 1998 OR2 धरती के बगल से गुजर गया, अब आएगा 11 साल बाद

Medhaj News 30 Apr 20,17:21:02 , Science & Technology Viewed : 78 Times
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अंतरिक्ष से आ रहा एस्टेरॉयड 1998 OR2 धरती के बगल से गुजर गया | इससे पृथ्वी को कोई खतरा नहीं था, क्योंकि यह धरती के करीब 63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरा है | इसके पहले ये एस्टोरॉयड 12 मार्च 2009 को 2.68 करोड़ किलोमीटर की दूरी से गुजरा था | अब धरती के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है |  क्योंकि इसके गुजरने के साथ ही दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने चैन की सांस ली है | हांलाकि, इस पर अध्ययन जारी रहेगा | एस्टेरॉयड 1998 OR2 अब 11 साल बाद फिर धरती के करीब से गुजरेगा लेकिन उसकी दूरी 1.90 करोड़ किलोमीटर होगी | आपको बता दें कि यह हर 11 साल पर धरती के आसपास से गुजर जाता है | 2031 के बाद 2042, फिर 2068 और उसके बाद 2079 में यह धरती के बगल से निकलेगा | 2079 में यह धरती के बेहद करीब से निकलेगा |  उस समय इसकी दूरी अभी की दूरी से 3.5 गुना कम होगी | यानी अभी वह 63 लाख किलोमीटर की दूरी से निकला है | 2079 में वह 17.73 लाख किलोमीटर की दूरी से निकलेगा | यह इस एस्टेरॉयड की धरती से सबसे कम दूरी होगी | आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने इस एस्टेरॉयड को लेकर अगले 177 साल का कैलेंडर बना रखा है | इससे यह पता चलेगा कि यह एस्टेरॉयड कब-कब धरती से कितनी दूरी से निकलेगा | 2079 के बाद एस्टेरॉयड 1998 OR2 साल 2127 में पृथ्वी से करीब 25.11 लाख किलोमीटर की दूरी से निकलेगा | वैज्ञानिकों ने इसे पोटेंशियली हजार्ड्स ऑब्जेक्टस (PHO) की श्रेणी में रखा है | 



अगर 2079 और 2127 में कोई गड़बड़ नहीं हुई तो उसके बाद यह एस्टेरॉयड धरती के लिए खतरा नहीं रहेगा | नासा का कहना था कि इस एस्टेरॉयड से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह इस बार धरती से करीब 63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा | अंतरिक्ष विज्ञान में यह दूरी बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती लेकिन कम भी नहीं है | एस्टेरॉयड 1998 OR2 का व्यास करीब 4 किलोमीटर है | इसकी गति करीब 31,319 किलोमीटर प्रतिघंटा है | यानी करीब 8.72 किलोमीटर प्रति सेंकड |  ये एक सामान्य रॉकेट की गति से करीब तीन गुना ज्यादा है | यह एस्टेरॉयड सूरज का एक चक्कर लगाने में 1,340 दिन या 3.7 वर्ष लेता है | इसके बाद एस्टरॉयड 1998 OR2 का धरती की तरफ अगला चक्कर 18 मई 2031 को हो सकता है | तब यह 1.90 करोड़ किलोमीटर की दूरी से निकल सकता है | खगोलविदों के मुताबिक ऐसे एस्टेरॉयड का हर 100 साल में धरती से टकराने की 50,000 संभावनाएं होती हैं |  लेकिन, किसी न किसी तरीके से ये पृथ्वी के किनारे से निकल जाते हैं | खगोलविदों के अंतरराष्ट्रीय समूह के डॉ. ब्रूस बेट्स ने ऐसे एस्टेरॉयड को लेकर कहा कि छोटे एस्टेरॉयड कुछ मीटर के होते हैं | ये अक्सर वायुमंडल में आते ही जल जाते हैं | इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है | बता दें कि साल 2013 में लगभग 20 मीटर लंबा एक उल्कापिंड वायुमंडल में टकराया था | एक 40 मीटर लंबा उल्का पिंड 1908 में साइबेरिया के वायुमंडल में टकरा कर जल गया था |



 


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    • Lets wait for 2031

      Commented by :Rajesh Singh
      20-05-2020 07:26:28

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