दुनियाभर के वैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की लकीरें, टूटा विश्व का सबसे बड़ा एंटीना

Medhaj News 18 Nov 20 , 09:52:03 Science & Technology Viewed : 1885 Times
radar.png

दुनियाभर के वैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं | उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वे करें तो क्या करें | दरअसल, अंतरिक्ष की ओर से आने वाले खतरों की जानकारी देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा एंटीना टूट गया है | एंटीना जिन केबलों से जुड़ा है, वो भी टूट गए हैं | अब इस एंटीने की मरम्मत का काम किया जाएगा | आइए आपको इस ताकतवर एंटीने के बारे में सारी जानकारी देते हैं | इस ताकतवर एंटीने की मदद से वैज्ञानिक अंतरिक्ष से आने वाले खतरों जैसे एस्टेरॉयड्स, मेटियॉर्स आदि की जानकारी हासिल करते हैं | यह एटीना आर्सीबो ऑब्जरवेटरी में लगा है जो प्यूर्टो रिको में स्थित है | इसके संचालन का काम एना जी मेंडेज यूनिवर्सिटी, नेशनल साइंस फाउंडेशन और यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा मिलकर देखते हैं | 





इस ऑब्जरवेटरी में एक काफी बड़ा एंटीना लगा है | यह एंटीना 1007 फीट तीन इंच व्यास का है | यह धरती की तरफ आ रही खगोलीय वस्तुओं के बारे में वैज्ञानिकों को जानकारी देता है | इस एंटीने में 1007 फीट व्यास वाले 40 हजार एल्युमिनियम के पैनल्स लगे हुए हैं | इनकी मदद से सिग्नल रिसीव किए जाते हैं | इस एंटीना को आर्सीबो रडार कहते हैं | इस एंटीने का निर्माण 1960 में शुरू हुआ था, जो 1963 में बनकर पूरा हुआ | ऑर्सीबो रडार यानी एंटीना कुल 20 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है | इसकी गहराई 167 फीट है | इस ऑब्जरवेटरी के जो केबल टूटे हैं, उनका वजन 5.44 लाख किलोग्राम था | इसके टूटे केबल पर 2.83 लाख किलोग्राम का वजन था | इसकी वजह से एंटीना के 100 फीट के हिस्से में बड़ा छेद हो गया है और इसका एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया है | इस एंटीने की मदद से दुनियाभर के वैज्ञानिक अंतरिक्ष पर नजर बनाए रखते हैं | 

इस एंटीना को बनाने के पीछे का मकसद रक्षा प्रणाली को मजबूत करना था | इसके जरिए प्यूर्टो रिको एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना चाहता था | लेकिन बाद में इसका प्रयोग अंतरिक्ष से आने वाले खतरों के लिए किया जाने लगा और इसने वैज्ञानिकों को सही जानकारी उपलब्ध कराई | इस एंटीना ने पिछले पांच दशक में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनकी मदद से मानव जाति को कई बार बचाया गया है | अब इस एंटीने को तत्काल मरम्मत की जरूरत है | चूंकि अगर अभी इसकी मरम्मत नहीं की गई तो यह पूरा गिर जाएगा और फिर इसे बनाने में काफी समय लग जाएगा | वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार, इस ताकतवर एंटीने के टूटने से लगभग 89.46 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है | ऑब्जरवेटरी के चीफ ने नेशनल साइंस फाउंडेशन से मरम्मत के लिए नुकसान की रकम की मांग की है | 


    2
    0

    Comments

    • Ok

      Commented by :Aslam
      18-11-2020 21:07:45

    • Ok

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      18-11-2020 17:43:44

    • Good

      Commented by :Saddam husain
      18-11-2020 17:33:47

    • Load More

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story