अब दुनिया को सात सितंबर का इंतजार, जब लैंडर 'विक्रम' चंद्रमा की सतह पर उतरेगा

Medhaj News 4 Sep 19,17:00:09 , Science & Technology Viewed : 39 Times
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इसरो ने बुधवार को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे निचली कक्षा में उतारने का दूसरा  चरण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इसरो के वैज्ञानिकों ने तड़के 3:42 बजे ऑन बोर्ड पोपल्‍शन सिस्‍टम का इस्‍तेमाल करते हुए लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे निचली कक्षा में उतार दिया। दो दिन पहले ही वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम को अलग करके स्‍पेस के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया था। अब दुनिया को सात सितंबर को तड़के 1.55 बजे के उस पल का इंतजार है जब निर्धारित कार्यक्रम के तहत लैंडर 'विक्रम' चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन (Indian Space Research Organisation, ISRO) ने बताया कि चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे नजदीकी कक्षा (35x97 किलोमीटर) में ले जाने का कार्य बुधवार को तड़के तीन बजकर 42 मिनट पर सफलतापूर्वक और पूर्व निर्धारित योजना के तहत किया गया। पूरी प्रकिया कुल नौ सेकेंड की रही।





अब अगले तीन दिनों तक लैंडर विक्रम चांद के सबसे नजदीकी कक्षा 35x97 किलोमीटर में चक्कर लगाता रहेगा। इन तीन दिनों तक विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की जांच की जाती रहेगी। योजना के मुताबिक यदि सब कुछ ठीक रहा तो लैंडर विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान के सात सितंबर को देर रात एक बज कर 30 मिनट से दो बज कर 30 मिनट के बीच चंद्रमा के सतह पर उतरने की उम्मीद है। लैंडर विक्रम दो गड्ढों, मंजि‍नस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदानी हिस्‍से में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर लैंड करेगा। चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान उसी दिन सुबह पांच बज कर 30 मिनट से छह बज कर 30 मिनट के बीच निकलेगा।





रोवर प्रज्ञान एक चंद्र दिवस यानी यानी धरती के कुल 14 दिन तक चंद्रमा की सतह पर रहकर परीक्षण करेगा। यह इन 14 दिनों में कुल 500 मीटर की दूरी तय करेगा। चंद्रमा की सतह पर लगातार 14 दिनों तक प्रयोगों को अंजाम देने के बाद रोवर प्रज्ञान निष्‍क्रिय हो जाएगा। यह चंद्रमा की सतह पर ही अनंत काल तक मौजूद रहेगा। दूसरी ओर ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसकी परिक्रमा करता रहेगा। ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में एक साल तक सक्रिय रहेगा। इसरो के अध्यक्ष के. सिवन के मुताबिक, चंद्रमा पर लैंडर के उतरने का क्षण ‘बेहद खौफनाक’ होगा क्योंकि एजेंसी ने पहले ऐसा कभी नहीं किया है। चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के वक्‍त लैंडर विक्रम की रफ्तार दो मीटर प्रति सेकंड होगी। भारतीय वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति को कम करते जाने की ही है।  लैंडर रोवर से वैज्ञानिकों का सीधा संपर्क नहीं होगा पूरी प्रक्रिया ऑर्बिटर के जरिए संचालित होगी। यही कारण है कि वैज्ञानिक इस पूरी प्रक्रिया के 15 मिनट को बेहद तनावपूर्ण मान रहे हैं।


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    • All the Best ISRO!!

      Commented by :Bhawana Maurya
      04-09-2019 12:10:40

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