vivo’s ‘Switch Off’ कैंपेन से अपने नए साल की शुरुआत करें

Medhaj News 25 Dec 20 , 15:16:14 Science & Technology Viewed : 817 Times
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नए साल में नया रिज़ॉल्यूशन लें

पूरी दुनिया के इतिहास में साल 2020 बिल्कुल अलग रहा. महामारी की वजह से दुनिया भर के लोग इस कदर प्रभावित थे कि हमारा बहुत-सा वक्त सिर्फ़ स्मार्टफ़ोन पर ही बीता. इसकी वजह महामारी से सुरक्षित रहने के लिए हमारा घर के अंदर रहना बेहद ज़रूरी था। सख्त लॉकडाउन के शुरुआती महीनों के दौरान, स्मार्टफ़ोन दुनिया से जुड़े रहने और खबर या जानकारी पाते रहने का हमारा इकलौता स्रोत था।  हालांकि, ‘डूमसडे स्क्रॉलिंग’ या दीवानों की तरह किसी विषय के बारे में खोजा जाना, उन लोगों के लिए एक कानूनी शब्द बन गया, जो सिर्फ़ और सिर्फ़ Covid-19 से जुड़ी चीज़ें या सामग्री लगातार खोज रहे थे. हम सचमुच हमारे फ़ोन को बंद नहीं कर सकते हैं क्योंकि हमें ये लत लग चुकी है कि कहीं, कुछ बेहद ज़रूरी खबर हमसे छूट न जाए।

हालांकि, अनजाने में की गई इस तरह की स्क्रॉलिंग हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। अगर आप इसके बारे में पहले से नहीं जानते थे, तो हम बता दें कि हमारे पास आंकड़ें मौजूद हैं कि हमें डिवाइस पर कितना वक्त बिताना चाहिए. vivo की कराई गई एक स्टडी के दूसरे भाग ‘स्मार्टफ़ोन और मानवीय संबंधों पर उनका प्रभाव 2020’ में हम साफ़ तौर पर देख सकते हैं कि इस साल सोशल डिस्टेंसिंग के दौरान हमारे स्मार्टफ़ोन, किस तरह हमारे जीवन का खास हिस्सा बन गए हैं। या यूं कहें कि अब हमारी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा स्मार्टफ़ोन के इर्द-गिर्द ही घूमता है।  इस स्टडी में स्मार्टफ़ोन के बढ़ते उपयोग के अलग-अलग पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया गया है, जैसे कि स्मार्टफ़ोन के इस्तेमाल की सीमा, इस्तेमाल के तरीके पर लॉक डाउन का असर, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामाजिक रिश्तों पर इसका असर।

ये स्टडी भारत के आठ खास शहरों में की गई और वहां कुछ खास तथ्य उभरकर आए जो यहां बताए जा रहे हैं।  दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे के अलग-अलग उम्र, लिंग, शिक्षा, और जाति वगैरह के 2000 लोगों की मदद से यह स्टडी की गई।  इनमें 30 % महिलाएं थीं और 70% पुरुष थे।

2020 की स्टडी के नतीजे

स्टडी में मालूम हुआ कि 66% भारतीयों का मानना है कि उनका स्मार्टफ़ोन, उनके जीवन की क्वॉलिटी में सुधार करता है।  इसके अलावा, 70% भारतीयों को लगता है कि अगर उनके स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल इसी तरह बढ़ता रहा, तो इससे उनके मानसिक / शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, स्टडी में भाग लेने वाले 74% लोगों ने कहा कि समय-समय पर अपने मोबाइल फ़ोन को बंद करने से वे अपने परिवार के साथ ज़्यादा वक्त बिता सकते हैं. जबकि, सिर्फ़ 18% यूज़र ही असल में अपने फ़ोन को स्विच ऑफ़ करते हैं. हालांकि, आपको यह जानकर कतई हैरानी नहीं होगी क्योंकि 84% यूज़र अपने फोन को बेडरूम में ले जाते हैं और 71% अपने खाने के वक्त पर भी उसका इस्तेमाल करते हैं।

2019 से अब तक हुए बदलाव

साल भर हुए घटनाक्रम की बदौलत, अब 2019 एक बीती हुई उम्र की बात लगता है. लेकिन, जब स्मार्टफ़ोन के इस्तेमाल की बात आती है, तो यह बहुत ज़रूरी नज़र आता है. इसी स्टडी में पाया गया कि लोगों ने पिछले साल अपने स्मार्टफ़ोन पर 4.94 घंटे बिताए जो मार्च 2020 तक 5.48 घंटे तक बढ़ गए और रोज़ाना 6.85 घंटे तक की इसमें बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब है कि सिर्फ़ एक साल में स्मार्टफ़ोन पर बिताए औसत दैनिक समय में 39% का इज़ाफा हुआ है।

इसके अलावा, जिन दूसरे आंकड़ों में बदलाव दिखा, उनमें सिर्फ़ 33% लोगों ने अपने स्मार्टफ़ोन के बिना पिछले साल चिड़चिड़ाहट या स्वभाव में बदलाव महसूस किया. जो साल 2020 की तुलना में 74% यानी दोगुने से भी ज़्यादा बढ़ गया है। जहां 52% लोगों ने 2019 में जागने के 15 मिनट के अंदर अपने स्मार्टफ़ोन की जांच की. इस साल यह संख्या बढ़कर 84% हो गई।

vivo India और ‘Switch Off’ कैंपेन

इनोवेटिव ग्लोबल स्मार्टफ़ोन ब्रैंड, vivo ने ‘Switch Off’ कैंपेन की शुरुआत की है, ताकि लोगों को स्मार्टफ़ोन का सही तरीके से इस्तेमाल करने के फ़ायदों के बारे में जागरूक किया जा सके और यह संदेश फैलाया जा सके कि आखिर हमें क्यों एक समय बाद अपने फोन को #SwitchOff करने की ज़रूरत है.

यह स्टडी सिर्फ़ एक तरीका है जिससे हम यह सारी सूचना, आंकड़ों और पुख्ता प्रमाण के साथ यूज़र के सामने रख सकते हैं. स्मार्टफ़ोन के उपयोग में बढ़ोतरी होने के बारे में हमें पहले से ही अंदेशा था।

निपुन मार्या, vivo India के डायरेक्टर-ब्रैंड स्ट्रैटजी ने स्टडी का सार बताते हुए कहा, “साल 2020 बेहद असामान्य था - यह एक ऐसा साल था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से महामारी ने हमें इस स्टडी को करने के लिए प्रेरित किया। स्मार्टफ़ोन हर चीज़ के लिए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के रूप में उभरा. हालांकि, इसके ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने यूज़र को इसका आदी बना दिया और नतीजतन ये मानव संबंधों और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है।

इस लत का मुकाबला करने के लिए, vivo India ने एक बहुत ही स्पष्ट और सरल उद्देश्य के साथ, 'Switch Off' कैंपेन शुरू किया है - जो लोगों के जीवन में खुशी लाए. आंकड़ें देखकर यह साफ़ हो जाता है कि हमारे स्मार्टफ़ोन पर हमारी निर्भरता कम करने की बेहद ज़रूरत हैं. खास तौर से आज महामारी के बाद की हमारी दुनिया में इसे ज़िंदगी का ‘सामान्य हिस्सा’ मान लिया गया है।

चूंकि, हर व्यक्ति की ज़रूरतें अलग-अलग हैं, इसलिए अपना स्मार्टफ़ोन स्विच ऑफ़ करने की कोई भी तय अवधि या समय नहीं है. हमारा कैंपेन आपको प्रोत्साहित करता है, ताकि हर दिन आप डिवाइस पर बिताए जाने वाले समय को कम कर सकें।

इसलिए, इस नए साल में, अपने स्मार्टफ़ोन को आपका स्वभाव, व्यवहार और जीवन न तय करने दें. अपने लिए कुछ वक्त निकालने, स्मार्टफ़ोन की आदत को कम करने और अपने स्मार्टफ़ोन के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाए रखने का संकल्प लें। यकीनन ऐसा करना पूरी तरह से मुमकिन है क्योंकि इसमें सिवाय इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता से ज़्यादा कुछ भी ज़रूरी नहीं है. आपको बस इतना करना है कि कुछ समय #SwitchOff को दें और अपने नज़दीकी और चहेते लोगों के साथ जीवन के कुछ पलों का आनंद लें!


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      Commented by :Aslam
      25-12-2020 19:42:16

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