गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः (दया संग्रह)

Medhaj News 5 Jul 20 , 12:08:09 Special Story Viewed : 7551 Times
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मेरी पिछली कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें--:

1) ऐ जिंदगी तू कितनी खूबसूरत है

2) शर्मिन्दा हूँ फिर भी मै जिन्दा हूँ

3) वफ़ादारी

4) कोरोना और मजदूर (दया संग्रह)



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कोरोना ने ऐसा प्रहार किया |

जन जन  को लाचार किया ||

तीज गया त्योहार गया बनियो का व्यापार गया,

धर्म कर्म की बात करें क्या |

आपस का व्यवहार गया ||


समय ने ऐसी रास है खींची,

नभ जल थल ने भी गति को थामा |

आना जाना हो गया दुष्कर,

हर पल रहता मानव डरकर ||


कैसे हो दर्शन मेरे ग़ुरुवर |

पूरनमासी दिन आन पड़ा है ||

गुरु दर्शन की बेला का,

शिष्य खड़ा लाचार अकेले |

वंचित हो, गुरु पर्व मेला का||

हे गुरुवर स्वीकार करें


मेरे दूरस्थ अभिनंदन को,

अभिषेक मेरा स्वीकार करें |

श्री चरणों में मेरे वन्दन को....



आपकी समीक्षाओं/ प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा में--->



---श्री दया प्रकाश पाठक ---



 



 


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    Comments

    • Nice

      Commented by :Vartika Mishra
      06-07-2020 09:55:36

    • Nice poem

      Commented by :Ajay kushawaha
      05-07-2020 23:08:25

    • गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें

      Commented by :Bhawana Maurya
      05-07-2020 14:59:59

    • Good

      Commented by :Gaurav Lohani
      05-07-2020 13:04:54

    • Wah bhut badhiya

      Commented by :Kunal chandra
      05-07-2020 12:54:16

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