अनिश्चित समय

Medhaj News 29 Jan 20 , 18:53:52 Special Story Viewed : 77 Times
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जैसा कि समय बहुत तेज़ी से बदल रहा है और यक़ीनन कहीं न कहीं हम सब में समय, कुछ न कुछ बदलाव ला ही रहा है। तो हम सबको ऐसा कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए कि समय के इशारे को समझ कर, कुछ सकारात्मक बदलाव खुद से ही कर लिये जाएँ। क्योंकि जब समय तेजी से  बदलेगा तो संभलने में थोड़ा ज़्यादा समय लग जायेगा परन्तु जब कुछ सकारात्मक बदलाव पहले से हुए रहेंगे तो हमें सामयिक बदलावों के साथ संतुलन बैठाने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। फिलहाल, ऐसे ही कुछ संभावित बदलावों से प्रेरित मेरी नयी कविता-



अनिश्चित समय



एक दिन सब पीछे छूट जायेगा,

जब वक़्त जाने का आएगा।

नाम बस संवादों में रह जायेगा,

और हक़ीक़त में सब कुछ बदल जायेगा।

चाहे जितनी यादें कैद कर लो,

फिर भी सब अजनबी सा हो जायेगा।


अभी तो हाल भी पूछ लिया करते हैं लोग,

तब पहचानने से भी परहेज़ हो जायेगा।

निभा लूँ कुछ रिश्तें अभी भी वक़्त है,

वक़्त के साथ हर रिश्तें का आकार बदल जायेगा।


ज़िन्दगी इसी ज़द्दोज़हद में कट रही है कि कौन अपना है?

और इसी भ्रम में सारा सफर तय हो जायेगा।

तो ऐसा ही है हम सबका आज- 'अनिश्चित आज'

----(प्रज्ञा शुक्ला)----


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    Comments

    • Very true lines.

      Commented by :Kalpana Verma
      10-02-2020 22:20:22

    • Very nice poem..

      Commented by :Siraj
      30-01-2020 12:25:09

    • Realistic approach.

      Commented by :Barjinder Singh
      29-01-2020 23:14:39

    • Very nice poem

      Commented by :Pawan Gupta
      29-01-2020 21:01:54

    • Nice poem

      Commented by :chandan kumar
      29-01-2020 20:45:11

    • Very nice...deep meaningful and truth representing lines

      Commented by :Bhawana Maurya
      29-01-2020 20:39:07

    • Nice lines...

      Commented by :Rajeev Kumar
      29-01-2020 20:31:33

    • Nice poem

      Commented by :Swati
      29-01-2020 20:10:40

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