ये तो न सोचा था- भाग 8

Medhaj news 1 Jun 20 , 18:44:33 Special Story Viewed : 1184 Times
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नोट: अगर आपने इस कहानी के पिछले भाग नहीं पढ़े हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं-

भाग- 1: ये तो न सोचा था

भाग- 2: ये तो न सोचा था

भाग- 3: ये तो न सोचा था

भाग- 4: ये तो न सोचा था

भाग- 5: ये तो न सोचा था

भाग- 6: ये तो न सोचा था

भाग- 7: ये तो न सोचा था



भाग- 8: ये तो न सोचा था?



अंकित जी, आप प्लीज मॉम के ठहरने की व्यवस्था करवा दीजिये न। वो एक्चुअली, सुधा की फॅमिली आज सुबह ही शहर से बाहर गयी है किसी रिलेटिव की शादी में, वरना मॉम वहीँ रूक जाती।

निखिल- यू डोंट वरी प्रियल, जब तक तुम ठीक नहीं हो जाती, तब तक आंटी मेरे घर पर रहेंगी।

प्रियल- मॉम, ये निखिल जी हैं इस हॉस्पिटल के ट्रस्टी के बेटे और डॉक्टर अंकित जी के दोस्त। जी थैंक यू, निखिल जी।

शुभी- अरे नहीं बेटा! ज्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। मैं यहीं हॉस्पिटल में पिया के साथ ही रुकूंगी। आखिर इतनी दूर से इसी के लिए तो यहाँ आयी हूँ।

अंकित- जी नहीं आंटी, आप ने हमें बेटा कहा है तो बेटे का फ़र्ज़ भी तो निभाने दीजिये न। प्रियल की देखभाल के लिए पूरा स्टाफ है यहाँ पर। इसीलिए आप दिन में प्रियल के साथ बातें कीजिये, समय बिताइए और शाम को मेरे साथ निखिल के घर चलेंगी।

(शुभी मना करने वाली नज़रों से प्रियल की ओर देखते हुए)

प्रियल: मॉम प्लीज़, मैं ठीक हूँ यहाँ पर। फिर दिन भर तो हम साथ में रहेंगे ही न। आप थोड़ा रेस्ट कर लेंगीं तो मुझे भी तसल्ली रहेगी।

शुभी (मन मारकर)- ठीक है बेटा, जैसा आप लोग ठीक समझें।

(शाम को शुभी और अंकित, निखिल के घर के हाल में प्रवेश करते हुए जहाँ महेंद्र जी पहले से ही बैठे हुए कोई किताब पढ़ रहे थे पर उनकी पीठ दरवाजे की ओर थी। इसलिए  उन्हें भी उन दोनों के आने का पता नहीं चला)

निखिल- आंटी जी, आप यहाँ पर बैठिये, मैं बस अभी थोड़ी देर में आता हूँ। ये कहकर निखिल अंदर वाले रूम में चल जाता है। और थोड़ी देर बाद अंकित भी बहाने से निखिल के पास चला जाता है जहाँ प्रियल भी पहले से मौजूद होती है।

शुभी अनमने ढंग से बैठने के लिए जैसे ही पलटती है हाल में लगी अपनी और महेंद्र जी की तस्वीर देखते ही चौंक जाती है और मन ही मन कहती है कि-'हे भगवान! ये कहाँ आ गयी मैं?' और इसी हड़बड़ाहट मैं वो लगभग गिरते- गिरते बचती है और उसका हाथ सोफे के बगल में रखे फ्लावर पॉट पर लग जाता है जिससे वो गिरकर टूट जाता है।

फ्लावर पॉट टूटने कि आवाज़ सुनकर, महेंद्र जी का ध्यान भंग होता है और उनकी नज़रें अपने आप ही शुभी की ओर उठ जाती हैं। शुभी को अचानक वहाँ देखकर उन्हें अपनी आँखों पर सहसा विश्वास ही नहीं हो पा रहा था और फिर एकदम से उनकी आँखे अश्रुओं से भर जाती है।

महेंद्र जी- शुभी, तुम यहाँ?

शुभी (गुस्से में)- हाँ, गलती से आ गयी। अगर पता होता कि आप यहाँ रहते हैं तो कभी न आती यहाँ पर। तो ये हॉस्पिटल आपका है और मतलब निखिल आपका ही बेटा है?

महेंद्र जी- नहीं, अब ये हॉस्पिटल सरकार और जनता का है और मैं तो इसका रखवाला मात्र हूँ। और हाँ निखिल खून के रिश्ते से तो नहीं, पर हाँ इंसानियत से मेरा ही बेटा है।

शुभी (गुस्से में)- क्या मतलब?

महेंद्र जी- मतलब ये की मैंने उसे गोद लिए था और पालन पोषण किया है। पर वो मेरे लिए सगे बेटे से भी बढ़कर है और और तुम्हें भी वो अपनी माँ की तरह ही मानता है।

शुभी (गुस्से में)- ठीक है, तो आपको आपका बेटा मुबारक हो। खुश रहिये अपने बनाये इस महल में। (ये कहकर शुभी गुस्से में बाहर जाने के लिए दरवाजे की और बढ़ती है)

महेंद्र जी- क्या तुम मुझसे इतनी नफ़रत करती हो कि मेरी तरफ देखना भी तुम्हें गवाँरा नहीं?

शुभी (लगभग चीखते हुए)- नहीं, मैं उस शख्स से बहुत नफरत करती हूँ जो मेरी कोख में पल रही बेटी को अपना नहीं सका और इस भरी दुनिया में मैंने कैसे उसे दुनिया की नज़रों से बचाया, ये मैं ही जानती हूँ पर अब मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है। और ये क्या, मैंने तो सुना है कि आपके हॉस्पिटल में बेटी को जन्म देने वालों को विशेष सुविधा मिलती है। गज़ब है जो व्यक्ति खुद बेटी नहीं चाहता था और उसके माता-पिता उसे जन्म से पहले ही मार देना चाहते थे वो समाज में बेटी बचाओ अभियान का दिखावा कर रहा है।

(उधर दूसरी ओर दीवार के पीछे खड़े निखिल, अंकित और प्रियल दोनों कि बात सुन रहे थे पर जैसे ही प्रियल ने ये सुना कि उसके पिता उसे इस दुनिया में लाना ही नहीं चाहते थे उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और आँखों से अश्रुधारा फूट पड़ी। वो दौड़ कर हॉल में जाना चाहती थी अपने मन में उठ रहे सारे सवालों के जवाब महेंद्र जी से पूछने के लिए। पर अंकित ने उसका हाथ जोर से पकड़ लिया और रुकने का संकेत किया और निखिल ने भी अंकित की बात में सहमति जतायी)

महेंद्र जी (उदास नज़रों से शुभी को देखते हुए)- शुभी, माना हमने ज्यादा साल साथ नहीं गुज़ारे थे पर क्या तुम मुझे बिल्कुल भी नहीं जान पायी थी?

शुभी- क..क..क्या मतलब है आपका?

महेंद्र जी- शुभी एक बार मेरी बात तो सुन लो फिर जो निर्णय तुम्हारा होगा, मुझे स्वीकार होगा।



न तुम बोले, न हम बोले;

और हम बिछड़ गए हौले-हौले।

कभी खास थे हम, आज आम हुए;

बिन गलती भी बदनाम हुए।

पर तुझपे न कोई आँच आये,

इसीलिए न अश्रु गिरे, न लब खोले,

न तुम बोले, न हम बोले;

हम बिछड़ गए हौले-हौले।

न संभल सके, न बदल सके;

हम बिखर गए हौले-हौले।

न तुम बोले, न हम बोले;

हम बिछड़ गए हौले-हौले।

एक बार तुम जो फिर मिल जाओ,

हम संवर जायें हौले-हौले,

ये जीवन सुधर जाये हौले-हौले।


शुभी- देखिये, पहेलियाँ मत बुझाइये और सही शब्दों में समझाइये?



(आखिर वो कौन सी बात है जो महेंद्र जी शुभी को बताना चाहते है ? जानने के लिए जुड़े रहे मेधज न्यूज़ के साथ)



[ इस कहानी का अगला भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें- भाग- 9: ये तो न सोचा था ]



----(भावना मौर्य)----



 


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    Comments

    • heart touching

      Commented by :arif ahamad
      03-06-2020 14:01:55

    • बहुत ही बढ़िया

      Commented by :Vinod Tiwari
      02-06-2020 23:36:25

    • Very beautiful

      Commented by :Mani
      02-06-2020 20:59:54

    • Maam ur all part continues our interest for next part..

      Commented by :Harshit Uttarakhand
      02-06-2020 19:07:57

    • Very nice

      Commented by :Vikash Kumar sinha
      02-06-2020 17:32:05

    • Nice

      Commented by :Faish Uddin
      02-06-2020 11:49:19

    • Good story

      Commented by :Manish Sharma
      02-06-2020 10:43:45

    • intresting story

      Commented by :amit maan
      02-06-2020 10:21:12

    • Good story

      Commented by :Aditya Yadav
      02-06-2020 09:19:06

    • This part is also sufficient enough to draw the attention of viewers. Very nice...

      Commented by :Rajeev Kumar
      02-06-2020 07:34:45

    • Beautiful

      Commented by :satyavir singh
      02-06-2020 06:58:33

    • Nice

      Commented by :Indrajeet Kumar yadav
      02-06-2020 05:57:53

    • Nice ...

      Commented by :Ajeet Singh
      02-06-2020 04:43:28

    • Nice

      Commented by :Sant Vijay Yadav
      01-06-2020 23:34:52

    • कहानी अन्त की ओर,,, हौले-हौले

      Commented by :Vishal Rajak
      01-06-2020 22:35:15

    • Nice ...

      Commented by :Ajeet singh
      01-06-2020 22:03:11

    • Very nice sentence ma'am Story mai Dam hai Waiting next part ma'am

      Commented by :Bhimlal Mahto
      01-06-2020 21:55:44

    • इंतज़ार कर रहे अगले भाग का.. बहुत सुन्दर पंक्तियां

      Commented by :Manoj Kumar
      01-06-2020 21:34:49

    • Good

      Commented by :Manish Ranjan
      01-06-2020 21:32:47

    • Nice

      Commented by :Manoj Singh,uttarakhand
      01-06-2020 21:14:35

    • Very nice

      Commented by :Aslam
      01-06-2020 20:54:11

    • Wonderful story...

      Commented by :Bhavna Tiwari
      01-06-2020 20:26:54

    • Truly a very nice story. Eagerly look forward to next edition

      Commented by :Mrityunjay Shukla
      01-06-2020 20:24:39

    • Superlike Ab agle bhag ka intezaar hoga.

      Commented by :Priyanshu kumar Priyadarshi
      01-06-2020 20:20:30

    • Its very much interesting. i have read all the parts of this story... But still i have not reached the end. Eageri Waiting for next part....... Suspense hi suspense....

      Commented by :Shahrukh
      01-06-2020 20:20:25

    • Superlike. But afsos kahani fir ek mod pr chhod kr chali gayi. Ab agle bhag ka intezaar hoga.

      Commented by :Vikash Kumar sinha
      01-06-2020 20:10:49

    • Superlike. But afsos kahani fir ek mod pr chhod kr chali gayi. Ab agle bhag ka intezaar hoga.

      Commented by :Vikash Kumar sinha
      01-06-2020 20:10:26

    • Beautifully narrated and so curious too...

      Commented by :Anshu jha
      01-06-2020 20:09:52

    • Interesting wating for next part

      Commented by :RIZWAN KHAN
      01-06-2020 20:09:22

    • Kya bat hai , kahani har mod par mod le Rahi hai

      Commented by :Sateesh Singh
      01-06-2020 20:01:36

    • Nice one

      Commented by :`ANIRBAN BASU, Ranchi
      01-06-2020 20:00:05

    • Intresting

      Commented by :Shivani
      01-06-2020 19:59:54

    • Good one

      Commented by :Rohit Deo
      01-06-2020 19:44:20

    • Oh fir se wait krna padega......

      Commented by :Vartika Mishra
      01-06-2020 19:40:29

    • Very good and waiting next part

      Commented by :Brijesh Patel
      01-06-2020 19:33:41

    • Very Nice...!

      Commented by :Pawan Tiwari
      01-06-2020 19:29:12

    • Good

      Commented by :Pawan Mishra
      01-06-2020 19:24:01

    • Tremendous...

      Commented by : LAL KRISHNA LAL
      01-06-2020 19:23:20

    • Reading continue

      Commented by :Mohammad Shaban
      01-06-2020 19:21:04

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