कविता - सीमा के हालात

Medhaj News 4 Jul 20 , 13:14:02 Special Story Viewed : 5681 Times
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नये युद्ध के मेघ छाने लगे हैं।

पड़ोसी गलत हक जताने लगे हैं।।


कभी पाक या चीन है घात करते।

कई मोरचे वो सजाने लगे हैं।।


शराफत नहीं त्यागते थे हम कभी भी

मगर बाहुबल हम दिखाने लगे हैं।


नहीं अब सहेंगे गुस्ताखियों को।

दिखाया जो' दम तिलमिलाने लगे हैं।।


अगर लाँघता हद तनिक शत्रु अब तो।

उन्हें धूल भी हम चटाने लगे हैं।।


भुला ज़िंदगी की सभी उलझनों को।

नया जोश सब में जगाने लगे हैं।।


जरूरत बड़ी हिंद में एकता की।

तिरंगा पुनः हम उठाने लगे हैं।।



-----प्रवीण त्रिपाठी(नोएडा)-----



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