कविता - बया...(एक प्रयास)

Medhaj News 15 Jul 20 , 16:27:36 Special Story Viewed : 6179 Times
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1) धूप में पथिक...​
2) आओ फिर...
3) झुग्गियां...
4) पत्थर दिल...
5) हँसने दो .....


तिनका तिनका  जोड़,

बना लिया एक धाम।

गहन सोच में डूब रही है

प्यारी बया बैठ मुकाम।


शांत है कितनी

नहीं कोई आक्रोश |

सिमट गई स्वयं मे

नहीं कोई रोष |


सोच रही है...

कैसे परिवार बढ़ाऊँ?

कैसे घर बसाऊँ?

ढह गया जो नीड़,

बारिश में पिछली बार।

फिर हिम्मत करती हूँ इस बार

संसार था सपनों वाला

परिवार बड़ा निराला।


तड़पे नन्हें जिन्दगी को

नहीं सहारा था जीने को।

यही दर्द लिये बैठी हूँ

गम को कहाँ भूली हूँ।


करना होगा पुनः प्रयास

परिवार बनाना है फिर खास ।

बनी रहे जीवन में आस।



----डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)----


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