कविता - गुनगुनाती धुप और परिंदे......(एक प्रयास)

Medhaj News 27 Jul 20 , 13:09:28 Special Story Viewed : 930 Times
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1) धूप में पथिक...​

2) आओ फिर...

3) झुग्गियां...

4) पत्थर दिल...

5) हँसने दो .....

6) बया...



सुबह गुनगुनी धूप खिली है, आओ पानी मे खेलें।

शीत अगर लग जाये हमको, उन्हें सुखाने पर फैलें।।


कभी धरा पर कभी गगन में, विचरण हम उन्मुक्त करें।

मस्ती में आकर हम सब, एक दूसरे को ठेलें।।


गूंज उठे कलरव से अपने दसों दिशाएँ पूर्ण तरह।

आज बाँट लें खुशियां मिलकर, जीवन का आनंद ले लें।।


जब तक जायें खेल- खेल कर अपने घर में हम लौटें।

भाई चारे रहे परस्पर, उगे प्रेम की नित बेलें।।



---डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)----



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    Comments

    • Nice

      Commented by :Sandeep kumar yadav
      29-07-2020 22:12:45

    • Nice poem

      Commented by :Farheen
      28-07-2020 16:58:22

    • Nice line

      Commented by :BAL GANGADHAR TILAK
      27-07-2020 18:21:02

    • Nice

      Commented by :Ajay Kumar Azad
      27-07-2020 17:34:02

    • nice

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      27-07-2020 17:11:42

    • Nice poem

      Commented by :Amit Kumar
      27-07-2020 17:00:58

    • Nice Poem

      Commented by :BHUPENDRA MAHAYACH
      27-07-2020 15:44:59

    • Good

      Commented by :Aditya Yadav
      27-07-2020 14:59:20

    • Nice poem

      Commented by :Rinku Ansari
      27-07-2020 14:46:35

    • Nice poem

      Commented by :Abhinav Kumawat
      27-07-2020 14:24:29

    • Nice

      Commented by :Ravishankar Srivastava
      27-07-2020 13:39:37

    • Nice

      Commented by :uday Parte
      27-07-2020 13:30:11

    • Nice poem

      Commented by :Ambrish Mishra
      27-07-2020 13:24:58

    • Nice

      Commented by :Raghunath Patra
      27-07-2020 13:20:47

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