कविता - (कोरोना) हर शख्स परेशान है

Medhaj news 11 Jul 20 , 20:05:06 Special Story Viewed : 5391 Times
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हर शख्स परेशान है, हर शख्स उलझन में | 

जान बचाने को हर इंसान है, कैद घर में || 

मिलती नहीं थी फुर्सत जिसको एक पल,

आज वो बिता रहा है फुर्सत के पल | 


करते थे जो एक-एक मिनट का हिसाब,

आज वो बिता रहे घंटो घंटो बेहिसाब | 

एक वायरस ने पूरी दुनिया को हिला दिया,

हर इंसान का गुरूर धरती पर ला दिया | 


चाहत रखता है इंसान, दुनिया जीतने की | 

झेल नहीं सकता मार एक तुच्छ वायरस की || 

प्रदूषण फैला कर जो पाई है तरक्की | 

वह तरक्की नहीं है विनाश की प्रवत्ती || 


प्रकृति से करोगे छेड़छाड़ | 

तो प्रकृति अपना रूप दिखाएगी || 

कहर बनकर प्रकृति, तुमको सबक सिखाएगी | 

अब भी समय है संभल जाओ,

बिना प्रदूषण फैलाये तरक्की अपनाओ || 


भगवान की बनाई सृष्टि में सबका है स्थान | 

कोई ना करे किसी दूसरे के अस्तित्व का नुकसान || 

आओ आज सब मिलकर प्रण करते हैं | 

सब रहे शांति से, सबका सम्मान करते हैं || 



-----ललित खंडेलवाल(मुंबई)-------


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