कविता - सुन लो न...!!

Medhaj News 7 Sep 20 , 18:58:43 Special Story Viewed : 11094 Times
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सुन लो न मेरी उन बातों को भी तुम,

जो मैं कहती नहीं हूँ तुमसे, लबों से कभी;

पढ़ लो न मेरी इन आँखों को भी तुम,

जिसमें बसते हो बस, तुम ही-तुम ही।


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समझ लो न मेरे उन एहसासों को भी तुम,

जो पनपने लगते हैं तेरी मौजूदगी से ही;

कह दो न अपने उन ज़ज्बातों को भी तुम,

जो तुम्हारे दिल में तो हैं, पर ज़ुबाँ पर आते नहीं।


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छू लो न मेरे इस अंतर्मन को भी तुम,

जो रूहानी हो गया है, तुमसे मिलते ही;

महसूस कर लो न मेरी उन आहटों को भी तुम,

जो तरंगित हो उठती हैं, तेरे स्पर्श भर से ही।

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जी लो न इस हसीं जिंदगानी को हर पल,

जिसका हिस्सा हों, बस मैं और तुम ही।

रचने दो न एक अनोखी कहानी को हमें,

जिसे भुलाया न जा सके, भुलाने से भी।


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-----(Copyright@भावना मौर्य)----



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