कविता - तू चलता जा अकेला फिक्र ना कर

Medhaj news 26 Aug 20 , 23:29:44 Special Story Viewed : 3283 Times
shayari.png

ये दुनियां है दुखों का मेला,

फिक्र ना कर ये रिश्तों का झमेला।

ये रिश्तों का ताना बाना तो हमनें ही बुना है,

पर उस ईश को देख जो रिश्तों से परे है।।


कर्म कर, आगे बढ़, लड़ना है तुझे, बढ़ना है तुझे।

बढ़ के फिर से इस रिश्ते में ना उलझ,

आखिर तुझे तो इससे पार जाना है।।

खुद को भूल जा, खुद के लिए भूल जा, खुद को ढूंढ तू।


खुद को ढूंढ ईश तुझे मिल जाएगा,

आखिर ईश भी तो तुझे ढूंढता है।।

तू खुद ईश है पर भूल गया, और ईश को ढूंढता है।

ईश तो खुद अधूरा है तेरे बिना,


तू कहां जा रहा है मेरे बिना।।

तू चलता जा अकेला फिक्र ना कर



----मिथिलेश कुमार सिंह----


    30
    0

    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story