कविता - हमेशा देर होती है

Medhaj news 30 Aug 20 , 23:51:07 Special Story Viewed : 3467 Times
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जरुरी बात कहनें को,

कभी आवाज  देनें को,

कोई वादा निभाने को,

बुलाने को कभी तुमको,

*हमेशा देर होती है।

किसी से मिलने जानें को,

कभी ढांढस बंधाने को,

कभी तो हाथ मिलाने में,

कभी फिर साथ जानें में,

*हमेशा देर होती है।


बदलते देख मौसम को,

इरादे नेक हों फिर भी,

हमेशा याद करने को,

किसी को भूल जानें को,

*हमेशा देर होती है।

गम से कभी बचाने को,

खुशी में खिलखिलाने को,

हकीकत कुछ और थी,

 यही बात बतलाने को,

*हमेशा देर होती है।


यह हकीकत नहीं मेरी,

ख्वाबों से शिकायत है,

 जो आगे चाहूँ  मैं बढ़ना,

तो पग पग पर आफत है।

दिल की बात कहने में,

*हमेशा देर होती है।



---डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)---



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