कविता - हँसने दो .....(एक प्रयास)

Medhaj News 12 Jul 20 , 18:36:03 Special Story Viewed : 9133 Times
happy.png

मेरी पिछली कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें---->
1) धूप में पथिक...​
2) आओ फिर...
3) झुग्गियां...
4) पत्थर दिल...


**************************************************



चेहरों पर खुशियों तुम ला दो,

कुछ पल इनके साथ बिता दो। 

आँखों में आँसू बहने दो,

खुलकर इनको भी हँसने दो।


रोते -रोते ये हँस देगें,

हँसते-हँसते ये रो देगें।

आशीर्वाद दुआएं देगें,

नहीं इन्हें रोने देगें।


कहने की कुछ चाहत है,

गाने की कोई तमन्ना है।

हँसी ठहाके फिर लौटा दो,

खुलकर इनको भी हँसने दो।


वृद्धावस्था बचपन जैसी,

बात कहें ना ऐसी वैसी।

खुशियों में इनको बहने दो,

हँसने दो इनको भी हँसने दो।



----डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)----


    107
    0

    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story