कविता - मधुमासी कुंडलिया(दो कुंडलिया छंद)

Medhaj news 18 Jul 20 , 11:22:10 Special Story Viewed : 850 Times
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1)संपूर्ण रथयात्रा

2)सीमा के हालात

3)सृजन की चाह​

4)आत्मावलोकन

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भँवरे गुंजन कर रहे, आया मौसम खास।

उपवन की शोभा बनें, टेसू और पलाश।

टेसू और पलाश, संग में चंपा बेला।

गेंदा और गुलाब, सजा रंगों का मेला।


फुलवारी अरु बाग, बसंती रँग में सँवरे।

पी कर नव मकरंद, गुँजाते बगिया भँवरे।।1


पी कर जब मकरंद को, भ्रमर बैठते फूल।

वह पराग को  छोड़ते, मौसम के अनुकूल।


मौसम के अनुकूल, खिलाते पुष्प रँगीले।

भाँति-भाँति के फूल, सजाते बाग सजीले।

बढ़ता मन अनुराग, खुशी मिलती है जी कर।

मन से हटा विषाद, छटा नैनों से पी कर।।
2



----प्रवीण त्रिपाठी(नोएडा)------


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    Comments

    • Very nice

      Commented by :Kunal chandra
      22-07-2020 19:37:51

    • Nice

      Commented by :Sandeep kumar yadav
      20-07-2020 13:13:22

    • nice

      Commented by :Ravi Kumar
      20-07-2020 08:48:32

    • Nice poem

      Commented by :Rinku Ansari
      18-07-2020 19:47:27

    • nice

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      18-07-2020 18:07:34

    • बहुत ही अच्छी कविता

      Commented by :Aditya Yadav
      18-07-2020 16:39:01

    • Nice poem

      Commented by :Ajay Kumar Azad
      18-07-2020 15:28:02

    • Nice Poem

      Commented by :BHUPENDRA MAHAYACH
      18-07-2020 14:24:20

    • Nice

      Commented by :AJEET Kumar
      18-07-2020 14:21:25

    • Good

      Commented by :Akhilesh Kumar Yadav
      18-07-2020 13:04:46

    • Gud

      Commented by :Harendra Singh
      18-07-2020 11:47:58

    • Nice

      Commented by :Sandeep kumar yadav
      18-07-2020 11:27:29

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