कविता - हिन्दी दिवस (दया संग्रह)

Medhaj News 14 Sep 20 , 11:45:27 Special Story Viewed : 3721 Times
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हिन्दी मात्र भाषा नहीं

मान, सम्मान, अभिमान है

भावो की अभिव्यक्ति का

हमको मिला वरदान है |


रस, छंद, अलंकार

हिन्दी के श्रृंगार 
हैं |

वेद पुराणों की भाषा है संस्कृत

जो हिन्दी की माता है |


हिन्दी दिवस मनाने का

औचित्य समझ ना आता है |

जन्म से लेकर मृत्यु तलक का

जिससे हर पल नाता है।


आओ सब मिलकर संकल्प करो

हिन्दी को अपनाकर

स्वयं पर गर्व करो ||


हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ



---आपकी समीक्षाओं/ प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा में---

*******श्री दया प्रकाश पाठक******* 



मेरी पिछली कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें--: मानवता बनाम नैतिकता ​


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