कविता - राखी...(एक प्रयास)

Medhaj News 2 Aug 20 , 12:15:09 Special Story Viewed : 1755 Times
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1) धूप में पथिक...​

2) आओ फिर...

3) झुग्गियां...

4) पत्थर दिल...

5) हँसने दो .....

6) बया...

7) सावन की तीज....​

8) गुनगुनाती धुप और परिंदे......



भैया रक्षा बंधन पर

तुम अवश्य ही आ जाना।

हो जायेगी इस वर्ष परायी,

बहन तुम्हारी प्यारी सी ।


सुनते ही आँसू बह निकले

कैसे आऊँ ?घर को बहना।

सरहद पर कोहराम मचा है

आने की तुम मत कहना।


सुन संदेशा भाई का,

बहिना की आस टूट गई।

रो -रो कर बहना के हाथों ,

पूजा की थाली छूट गई।


ठीक है ,राखी पर मत आना।

सरहद पर अपना धर्म निभाना ।

नाज़ कर रही बहना तुमसे भाई पर।

देश के रक्षक और हिन्द सिपाही पर।


रक्षासूत्र में छलकती तेरी छवि ही मेरा अनूठा त्यौहार है

हरबार की तरह ,यह रक्षाबंधन भी यादगार है।



---डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)----



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