कविता - सावन की तीज....(एक प्रयास)

Medhaj News 25 Jul 20 , 14:46:56 Special Story Viewed : 2634 Times
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1) धूप में पथिक...​

2) आओ फिर...

3) झुग्गियां...

4) पत्थर दिल...

5) हँसने दो .....

6) बया...



सावन की रिमझिम से उपवन

      भीगा चारों ओर

पहन लहरिया रंग रंगीला

     नाचे मन का मोर।


सखियां भी तो आज सजी हैं

      कर सोलह श्रृंगार

खीर पूडी़ के संग किया है

    घेवर का आहार।


हरी चुनरिया ओढे़ धरती 

     कितनी खुश है आज

छेड़ राग मल्हार रहे हैं

     नभ में बादलराज।


पहन लहरिया सजी हुई मैं

        खडी़ हो गई द्बार

बाट जोहती हूँ प्रियतम की

         करने को दीदार।


मेरे तन पर सजा लहरिया 

       मन में भरे तरंग।

पाव पडे़ न आज धरा पर

         पल पल उठे उमंग।


लहराता आया है सावन 

       लेकर संग फुहार

और तीज से त्योहार का देता

      है उपहार।



----डा.बंदना जैन(कोटा,राजस्थान)----



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