कविता - मौन की व्यथा (दया संग्रह)

Medhaj News 8 Jul 20 , 17:45:25 Special Story Viewed : 21377 Times
hindi_cover1.png

मेरी पिछली कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें--:

1) ऐ जिंदगी तू कितनी खूबसूरत है

2) शर्मिन्दा हूँ फिर भी मै जिन्दा हूँ

3) वफ़ादारी

4) कोरोना और मजदूर (दया संग्रह)

5) गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः



ज़िन्दगी ने पूछा- 'आप इतना चुप क्यों है?'

मैंने नज़रे उठाई-मन को टटोला,

उत्तर देना था तो कुछ इस तरह बोला-


'ऐ ज़िन्दगी', चाहता तो बहुत हूँ कि मैं भी कुछ बोलूं,

मन की भावनाओ को आपके समक्ष खोलूं,

एक-आध प्रयास भी किया, पर विफल रहा,

विचारों को शब्दों का जामा पहनाने में;


और जब-जब विचारों को शब्दों में गढ़ा,

ज़माने ने उसे उल्टा ही पढ़ा;

क्योंकि जब भी बोलना चाहा-

दिन पर, रात पर, मौसम के तुषारापात पर,


अपनी आस्था पर, समाज की अव्यवस्था पर, विदेश की नीति पर,

देश की राजनीती पर, सुबह पर, शाम पर, शायर के कलाम पर,

नियम पर, कानून पर, जीने के जूनून पर, धर्म पर, अधर्म पर,

मानवता के मर्म पर; सब ने कहा- साला बेवकूफ है।


बेईमानी की नदी में, ईमानदारी की नाव चलाना चाहता है,

खुद तो डूबेगा ही हमें भी डुबाना चाहता है;

इसके बाद मैं क्या बोल सकता हूँ?

मौन रहने में ही भलाई समझता हूँ, 


क्योंकि मुझ पर भी आप की तरह परिवार की जिम्मेदारी है.

गलती सिर्फ इतनी है कि मैं रोटी खाकर संतुष्ट होना चाहता हूँ,

और खून के आँसुओं से सींचकर अपने अरमान पूरा करना चाहता हूँ,

इसीलिए मैं मौन हूँ और भीड़ मे भी कोई नहीं जानता कि मै कौन हूँ?



आपकी समीक्षाओं/ प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा में--->

---श्री दया प्रकाश पाठक ---



 


    103
    1

    Comments

    • Nice

      Commented by :Md Nazir
      16-07-2020 22:12:07

    • Nice poem

      Commented by :Kunal chandra
      10-07-2020 20:07:52

    • Nice Explain

      Commented by :priya
      10-07-2020 18:32:24

    • Good Poem////////

      Commented by :Anupama
      10-07-2020 10:39:07

    • भाव - विचारों की अभिव्यक्ति एक आम ईमानदार नागरिक की स्थिति को दर्शाती है जो प्रचलित सामाजिक प्रवाह का जोर झेल पाने में असमर्थ हो जाता है. धारा के विपरीत तैरने का जज्बा पैदा होने पर ही बदलाव के अवसर बन पाते हैं .और अगली पीढ़ी में यह आत्मबल कविता पैदा कर पाये, साहित्य से यह अपेक्षा बनी रहेगी. इस उत्तम रचना के लिये शुभकामनाएं ! राकेश चन्द्र नौटियाल, देहरादून

      Commented by :????? ?????? ???????
      09-07-2020 19:06:39

    • Bhot khub....

      Commented by :Ritesh patidar
      09-07-2020 12:29:22

    • Nice poem

      Commented by :INDRAJEET SINGH
      09-07-2020 11:11:49

    • Superb

      Commented by :Ritu Singh
      09-07-2020 10:14:18

    • Nice poem

      Commented by :Vartika Mishra
      09-07-2020 10:13:11

    • Very heart touching lines.

      Commented by :Md Shahbaz Alam
      09-07-2020 09:29:27

    • Nic poem

      Commented by :Suraj patel
      09-07-2020 09:08:06

    • Nice line

      Commented by :Amit Kumar
      08-07-2020 23:16:47

    • Nice

      Commented by :BHUPENDRA MAHAYACH
      08-07-2020 22:06:42

    • Very nicely expressed

      Commented by :Bhawana Maurya
      08-07-2020 21:35:13

    • Nice

      Commented by :Nidhi Azad
      08-07-2020 21:27:03

    • Nice

      Commented by :Ajay Kumar Azad
      08-07-2020 21:07:39

    • Nice

      Commented by :AJEET Kumar
      08-07-2020 20:38:56

    • Nice line

      Commented by :Ashish kumar nainital
      08-07-2020 20:14:38

    • Nice line

      Commented by :Brijesh Patel
      08-07-2020 20:00:57

    • Nice line

      Commented by :Mintu kumar
      08-07-2020 19:51:41

    • Nice lines

      Commented by :Md Nazir
      08-07-2020 19:27:32

    • Nice line

      Commented by :Priyanshu kumar Priyadarshi
      08-07-2020 19:25:43

    • What a deep meaningful poem...... Well deserved satirical one on sick Thought Process of the contemporary society......... Thanks so much for sharing such a heart rendering thought........ Touched the innermost........ Please keep on sharing such wonderful thoughts..........

      Commented by :Parveen Bhalla
      08-07-2020 19:20:00

    • Nice line

      Commented by :Aditya Yadav
      08-07-2020 19:18:09

    • Good one

      Commented by :Arpit Pandey
      08-07-2020 18:53:35

    • Nice line

      Commented by :Mazhar
      08-07-2020 18:30:26

    • Nice lines

      Commented by :Sirajuddin Ansari
      08-07-2020 18:22:15

    • मौन रहते हुए भी सब कुछ कह दिया आपने ।

      Commented by :Sudha
      08-07-2020 18:20:30

    • nice

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      08-07-2020 18:15:20

    • Nice..

      Commented by :LAL KRISHNA LAL
      08-07-2020 18:13:13

    • khoob

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      08-07-2020 18:03:16

    • Bahut khoob

      Commented by :Vikash Kumar sinha
      08-07-2020 18:02:13

    • Nice Poem

      Commented by :Ajay K
      08-07-2020 17:51:05

    • Load More

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story