कविता - झूठ की दुनिया

Medhaj News 29 Jul 20 , 13:20:20 Special Story Viewed : 6972 Times
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1)  मेरी अभिलाषा​

2)  तन्हाई​

3)  मध्यम वर्गीय



झूठ की दुनिया है,

दिखावे का बोलबाला,

सच दम तोड़ रहा, कोने में,

हर तरफ फैला अंधियारा |


होड़ लगी है दुनिया में,

मंजिल को पाने की,

झूठ, दिखावा और धोखा,

सब कुछ अपनाने की |


ऐसी मंजिल मिल भी जाय,

तो ये मंजिल किस काम की,

सुकून न मिले जिसमें,

वो मंजिल है विनाश की |


भगवान करेंगे हिसाब कर्मों का,

तब तू क्या जवाब देगा,

मंजिल तो छूट जायेगी दुनिया मे,

रह जायेगा सिर्फ कर्मों का खेला |


मंजिल और कर्मों का,

विचित्र ये खेल है,

कोई जीत कर भी हारे,

किसी की हार में भी जीत है |



         स्वरचित

---- ललित खंडेलवाल----


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