कविता - खुशियाँ

Medhaj News 23 Oct 20 , 18:06:41 Special Story Viewed : 1894 Times
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कोई रोक न ले हमको यूहीं,

चले जब भी पवन के झोके | 

मस्त मन झूमे जब सहज मेरा,

राहें भी कर दू सुगम-सरल तेरी
 । 

कभी मेरे सपनो की सहज-प्रेम सच्चाई,

मुरझाई हुई कलियों को जीवन देने वाली,

हकीकत में जमी पर आ जा खुशियाँ बनके,

दे दू तुझे मै एक सूंदर-सहज चाँद सी मूरत।
 

शांत मन का चँचल-पन,

अटखेलिया करे हर दम,

माँग न ले खुशियाँ मेरी,

डर लगे मन को हर दम। 


जीवन का रंग हर किसी को लगता सुनहरा,

हर कोई चाहे इससे करते रहना अटखेलिया। 



 " सच में यही खुशियों की सच्चाई है "


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