कविता - प्रकृति

Medhaj News 30 Jun 20 , 12:49:32 Special Story Viewed : 9697 Times
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वक्त गुजरता जा रहा है, पर कुछ कर नहीं पा रहे है।

मिलना है सभी से, पर मिल नहीं पा रहे है।

कहना है बहुत कुछ, पर किसी से कुछ भी कह नहीं पा रहे है।

खुली हवा में जीने की चाहत है, पर खुलकर जी नहीं पा रहे है।


दोस्तो के साथ में मौज मस्ती करने का मन तो बहुत है,

पर मौज मस्ती तो दूर, बात तक सही से नहीं कर पा रहे है।

वस्त्र आदि  चीजों को उपयोग में लाकर दूसरो को दिखाना है,

पर क्या करे घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे है।


बाजार में जाकर अपनो के साथ चाट,

बताशे खाने की इच्छा है पर क्या करे खा नहीं पा रहे है।

चार दिवारी में कैद हो गई है ज़िन्दगी,

लग गई है बेड़ियां पावो में सभी के,

पर फिर भी अपनो से भी नज़रे मिला नहीं पा रहे है।


अब तो शादियों का भी बस इंतजार रह गया,

कोई तो डर के कारण अपने सगे संबंधियों के शादी समारोह में जा नहीं पा रहे है।

उसके बावजूद किसी को है धनदौलत की चिंता,किसी को है अपने परिवार की चिंता।

किसी को है खुद के भविष्य की चिंता तो किसी को है देश के भविष्य की चिंता।


किसी को है अपने रोजगार की चिंता,तो किसी को है अपनी पगार की चिंता।

पर कभी एक बात सोची किसी ने,की अब नहीं रह गया समाज में कोई दिखावा।

नहीं रह गई वो काल्पनिक चकाचौंध की दुनिया,

धुंधली पड़ गई सारी जगमग जगमग करती रोशनी की किरण।


और अब तो बस यही रह गई आशा की किरण की कब फिर से सारे दिन अच्छे हो जाएंगे,

कब हम सभी मिलकर कदम बढ़ाएंगे।

पर इसके विपरित दूसरी ओर देखो वास्तविकता का दौर,देखो प्रकृति की सादगी।

वो नदियां वो झीलें वो समुद्र वो निर्मल जल,जो कि आजकल खुल कर जी रहे है।


क्योंकि वो निर्मल जल की धारा,वो प्रदूषण मुक्त  हवा की सादगी, वो चहचहाती पंछियों की बोली।

वो मयूर का नृत्य ,वो बागो में फूलों की बहार ,

ऐसा लगता है कि मानो अपनी प्रकृति को खुलकर जीने की आजादी मिल गई है,

तभी वो वक़्त पर आती हुई वर्षा ऋतु हमारी प्राकृतिक सौंदर्यता को दर्शाती  है।


पर इस पर पर प्रकृति ने हर इक नर नारी से पूछा कि क्या किसी को है हमारे भी भविष्य की चिंता।

इस पर प्रकृति ने कहा, मैं लौट आई हूं फिर से इक बार,जरा इस बात पर करना विचार,

तुम सभी ने मुझको प्रदूषित किया था, इसलिए बिगड़ गई थी मेरी भी हालत,

अभी इस महामारी में आप सभी बैठे हो अपने घरों में अब नहीं रहा कोई प्रदूषित करने को,


इसीलिए अभी सुधर गई है थोड़ी मेरी हालत, बदल गई है मेरी फिर से तकदीर,

जाते जाते फिर वही बात मैं करती हूं सभी से यार,

अगर चाहते हो ऐसी ही खुशहाली तो मत करना प्रदूषित फिर से मुझे, खुश रखना इसी तरह से मुझे।


------आशुतोष द्विवेदी(सौभाग्य)------


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    Comments

    • Nature❤️

      Commented by :Badre Alam
      13-07-2020 09:56:17

    • Nice poem

      Commented by :Amit Kumar
      01-07-2020 00:22:23

    • Nice poem

      Commented by :BAL GANGADHAR TILAK
      30-06-2020 19:35:38

    • nice

      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      30-06-2020 18:23:19

    • Nice Poem

      Commented by :BHUPENDRA MAHAYACH
      30-06-2020 16:25:19

    • Nice poem

      Commented by :Md Shahnawaz
      30-06-2020 15:32:06

    • Nice poem..

      Commented by :Ashutosh Kumar
      30-06-2020 15:21:51

    • Nice poem.

      Commented by :Pankaj Kumar
      30-06-2020 15:06:50

    • nice

      Commented by :uday Parte
      30-06-2020 15:06:34

    • Nice lines

      Commented by :Sirajuddin Ansari
      30-06-2020 15:03:04

    • nice

      Commented by :Arif Ahamad
      30-06-2020 14:47:02

    • Nice

      Commented by :Nidhi Azad
      30-06-2020 14:36:33

    • Nice

      Commented by :Ravindra
      30-06-2020 14:29:18

    • Nice poem

      Commented by :Prabhat Kumar (prayagraj)
      30-06-2020 14:28:55

    • Nice

      Commented by :Nishikant kumar (AITM)DSS
      30-06-2020 13:55:46

    • Nice lines..

      Commented by :Rajeev Kumar
      30-06-2020 13:49:50

    • Nice Poem

      Commented by :Markandeshwar Pandey
      30-06-2020 13:47:59

    • Nice poem

      Commented by :Ajay Kumar Azad
      30-06-2020 13:39:50

    • Nice poem

      Commented by :Mithilesh Kumar Panda
      30-06-2020 13:33:28

    • Superb

      Commented by :KApiL DEv
      30-06-2020 13:13:58

    • Nice

      Commented by :LAL KRISHNA LAL
      30-06-2020 13:13:21

    • Nice Poem

      Commented by :Ajay kushawaha
      30-06-2020 13:12:18

    • Very nice poem

      Commented by :Tajuddin Akhtar
      30-06-2020 13:06:35

    • Nice poem

      Commented by :Rinku ansari
      30-06-2020 13:05:44

    • Nice poem

      Commented by :Kunal chandra
      30-06-2020 13:04:54

    • nice

      Commented by :Rohit gautam
      30-06-2020 13:03:06

    • Very nice

      Commented by :Mahendra Singh
      30-06-2020 13:01:31

    • Nice lines

      Commented by :Ashish
      30-06-2020 12:56:09

    • Beautiful peom....Touching

      Commented by :Rohit Deo
      30-06-2020 12:54:59

    • Nice poem

      Commented by :Priyatosh ranjan
      30-06-2020 12:54:17

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