Skandamata Aarti And Puja Mantra: स्कंदमाता की आरती, इन मंत्रों के जाप से मनोकामनाएं होंगी पूर्ण

Medhaj News 20 Oct 20 , 22:04:49 Special Story Viewed : 2088 Times
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नवरात्रि : 5 वें दिन पूजा और मंत्र

नवरात्रि के 5 वें दिन , भक्त स्कंदमाता  की पूजा करते हैं। देवी स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि पूजा के पांचवें दिन की जाती है । यह शब्द दर्शाता है कि वह भगवान कार्तिकेय या स्कंद की माता हैं। माता स्कंदमाता एक शेर पर आरूढ़ हैं और उन्होंने अपनी गोद में छोटे बच्चे स्कंद को छह मुखों से ढोया है।

यह माँ दुर्गा का सबसे अद्भुत रूप है जो अपने दिव्य बच्चे कार्तिकेय या स्कंद को ले जाते हुए देखा जाता है। इसलिए वह आनंदित और अत्यधिक परोपकारी भी दिखाई देती है। इस रूप से भक्तों को जुड़वां लाभ होते हैं क्योंकि स्कंदमाता की पूजा करने वालों को उनके गोद में बैठे स्कंद की कृपा भी प्राप्त होगी। स्कंदमाता का चेहरा इतना भड़कीला है और वह अपने भक्तों पर अपना स्नेह वैसे ही दिखाती हैं जैसे वह अपने दिव्य पुत्र कार्तिकेय पर करती हैं। माँ स्कंदमाता महत्व माँ स्कंदमाता बुध या बुध ग्रह की शासक हैं। वह उन भक्तों पर प्रसिद्धि, धन और समृद्धि की शुभकामनाएं देती हैं जो ईमानदारी और निष्ठा के साथ उनकी पूजा करते हैं। वह अपने भक्तों के साथ दयालु है और इसलिए उनकी कुंडली में मंगल की प्रतिकूल स्थिति के कारण होने वाले सभी कष्टों को दूर करती है। नवरात्रि के 5 वें दिन माँ स्कंदमाता पूजा माँ स्कंदमाता को लाल रंग के फूल विशेष रूप से गुलाब पसंद हैं। नवरात्रि के पाँचवें दिन, माँ स्कंदमाता की पूजा पूरी श्रद्धा और ईमानदारी से दिव्य माँ और साथ ही दिव्य पुत्र का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करें। माँ स्कंदमाता और स्कंद को षोडशोपचार चढ़ाएँ और आरती के साथ पूजा संपन्न करें। सांसारिक सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें, हालांकि सांसारिक सुख-सुविधाओं के साथ।

नवरात्रि पांचवें दिन Skandamata मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।



नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

स्कंदमाता की पूजा का महत्व

स्कंदमाता की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो नि:संतान दंपत्ति हैं, उनको स्कंदमाता के आशीर्वाद से संतान सुख मिलता है। संकट और शत्रुओं के दमन के लिए भी स्कंदमाता की पूजा करना उत्तम होता है।

आज क्या करें

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन आपको स्कंदमाता को बताशे का भोग लगाना चाहिए। वहीं, पूजा में कमलगट्टा, पान, सुपारी, लौंग का जोड़ा और किसमिस चढ़ाना चाहिए।


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