advy_govt

रामायण काल से जुड़े 10 रहस्य जिनसे दुनिया है अनजान

Medhaj news 31 Dec 20 , 08:14:29 Special Story Viewed : 1535 Times
pjimage_1_14_696x420.jpg

प्राचीन भारत में रामायण काल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस काल में मानव अपने वर्तमान स्वरूप में विकसित होने के साथ ही उस काल की कई प्रजातियां लुप्त भी हो रही थी। रामायण काल को भारत का सबसे महत्वपूर्ण काल माना जाता है। आओ जानते हैं इस काल के संबंध में 10 अनसुनी या अनजान बातें।

1. रामायण काल में थे सिंधु घाटी के नगर : पुरातत्व वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी की पॉटरी की नई सिरे से पड़ताल की और ऑप्टिकली स्टिम्यलैटड लूमनेसन्स तकनीक का इस्तेमाल करके इसकी उम्र का पता लगाया तो यह 6,000 वर्ष पुराने निकले हैं। इसके अलावा अन्य कई तरह की शोध से यह पता चला कि यह सभ्यता 8,000 वर्ष पुरानी है। इसका मतलब यह कि यह सभ्यता तब विद्यमान थी जबकि भगवान श्रीराम (5114 ईसा पूर्व) का काल था और श्रीकृष्ण के काल (3228 ईसा पूर्व) में इसका पतन होना शुरू हो गया था। वैज्ञानिकों की इस टीम के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार हरियाणा के भिर्राना और राखीगढ़ी में भी था। आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीनता को लेकर नए तथ्‍य सामने रखे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी थी। इस लिहाज से यह सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से भी पहले की है। मिस्र की सभ्यता 7,000 ईसा पूर्व से 3,000 ईसा पूर्व तक रहने के प्रमाण मिलते हैं, जबकि मोसोपोटामिया की सभ्यता 6500 ईसा पूर्व से 3100 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में थी। शोधकर्ता ने इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता से 1,0000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले हैं। सिंधु घाटी में ऐसी कम से कम आठ प्रमुख जगहें हैं जहां संपूर्ण नगर खोज लिए गए हैं। जिनके नाम हड़प्पा, मोहनजोदेड़ों, चनहुदड़ो, लुथल, कालीबंगा, सुरकोटदा, रंगपुर और रोपड़ है।

2. विचित्र किस्म की प्रजातियां : भगवान राम का काल ऐसा काल था जबकि धरती पर विचित्र किस्म के लोग और प्रजातियां रहती थीं, लेकिन प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से ये प्रजातियां अब लुप्त हो गई। जैसे, वानर, गरूड़, रीछ आदि। माना जाता है कि रामायण काल में सभी पशु, पक्षी और मानव की काया विशालकाय होती थी। मनुष्य की ऊंचाई 21 फिट के लगभग थी।

3. रामायण काल के अविष्कार : रामायण काल में कई वैज्ञानिक थे। नल, नील, मय दानव, विश्वकर्मा, अग्निवेश, सुबाहू, ऋषि अगत्स्य, वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि कई वैज्ञानिक थे। रामायण काल में भी आज के युग जैसे अविष्कार हुए थे। रामायण काल में नाव, समुद्र जलपोत, विमान, शतरंज, रथ, धनुष-बाण और कई तरह के अस्त्र शस्त्रों के नाम तो आपने सुने ही होंगे। लेकिन उस काल में मोबाइल और लड़ाकू विमानों को नष्ट करने का यंत्र भी होता था।

रामायण काल में विभीषण के पास 'दूर नियंत्रण यंत्र' था जिसे 'मधुमक्‍खी' कहा और जो मोबाइल की तरह उपयोग होता था। वि‍भीषण के पास दर्णन यंत्र भी था। लंका के 10,000 सैनिकों के पास 'त्रिशूल' नाम के यंत्र थे, जो दूर-दूर तक संदेश का आदान-प्रदान करते थे। इसके अलावा दर्पण यंत्र भी था, जो अंधकार में प्रकाश का आभास प्रकट करता था।

लड़ाकू विमानों को नष्‍ट करने के लिए रावण के पास भस्‍मलोचन जैसा वैज्ञानिक था जिसने एक विशाल 'दर्पण यंत्र' का निर्माण किया था। इससे प्रकाश पुंज वायुयान पर छोड़ने से यान आकाश में ही नष्‍ट हो जाते थे। लंका से निष्‍कासित किए जाते वक्‍त विभीषण भी अपने साथ कुछ दर्पण यंत्र ले आया था। इन्‍हीं 'दर्पण यंत्रों' में सुधार कर अग्‍निवेश ने इन यंत्रों को चौखटों पर कसा और इन यंत्रों से लंका के यानों की ओर प्रकाश पुंज फेंका जिससे लंका की यान शक्‍ति नष्‍ट होती चली गई। एक अन्य प्रकार का भी दर्पण यंत्र था जिसे ग्रंथों में 'त्रिकाल दृष्‍टा' कहा गया है, लेकिन यह यंत्र त्रिकालदृष्‍टा नहीं बल्‍कि दूरदर्शन जैसा कोई यंत्र था। लंका में यांत्रिक सेतु, यांत्रिक कपाट और ऐसे चबूतरे भी थे, जो बटन दबाने से ऊपर-नीचे होते थे। ये चबूतरे संभवत: लिफ्‍ट थे।

4. भवन निर्माण कार्य : रामायण काल में भवन, पूल और अन्य निर्माण कार्यों का भी जिक्र मिलता है। इससे पता चलता है कि उस काल में भव्य रूप से निर्माण कार्य किए जाते थे और उस काल की वास्तु एवं स्थापत्य कला आज के काल से कई गुना आगे थी। उस युग में विश्वामित्र और मयासुर नामक दो प्रमुख वास्तु और ज्योतिष शास्‍त्री थे। दोनों ने ही कई बड़े बड़े नगर, महल और भवनों का निर्माण किया था। गीता प्रेस गोरखपुर से छपी पुस्तक 'श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण-कथा-सुख-सागर' में वर्णन है कि राम ने सेतु के नामकरण के अवसर पर उसका नाम 'नल सेतु' रखा। इसका यह कारण था कि लंका तक पहुंचने के लिए निर्मित पुल का निर्माण विश्वकर्मा के पुत्र नल द्वारा बताई गई तकनीक से संपन्न हुआ था। महाभारत में भी राम के नल सेतु का जिक्र आया है।

5. रावण की लंका : हिन्दू पौराणिक इतिहास अनुसार श्रीलंका को शिव ने बसाया था। शिव की आज्ञा से विश्वकर्मा ने यहां सोने का एक महल पार्वती जी के लिए बनवाया था। ऋषि विश्रवा ने शिव के भोलेपन का लाभ उठाकर उनसे लंकापुरी दान में मांग ली। तब पार्वती ने श्राप दिया कि महादेव का ही अंश एक दिन उस महल को जलाकर कोयला कर देगा और उसके साथ ही तुम्हारे कुल का विनाश आरंभ हो जाएगा। विश्रवा से वह लंकापुरी अपने पुत्र कुबेर को मिली लेकिन रावण ने कुबेर को निकाल कर लंका को हड़प लिया। शाप के कारण शिव के अवतार हनुमान जी ने लंका जलाई और विश्रवा के पुत्र रावण, कुंभकर्ण के कुल का विनाश हुआ। श्रीराम की शरण में होने से विभीषण बच गए।

वाल्मीकि रामायण में लंका को समुद्र के पार द्वीप के मध्य में स्थित बताया गया है अर्थात आज की श्रीलंका के मध्य में रावण की लंका स्थित थी। श्रीलंका के संस्कृत एवं पाली साहित्य का प्राचीनकाल से ही भारत से घनिष्ठ संबंध था। भारतीय महाकाव्यों की परंपरा पर आधारित 'जानकी हरण' के रचनाकार कुमार दास के संबंध में कहा जाता है कि वे महाकवि कालिदास के अनन्य मित्र थे। कुमार दास (512-21ई.) लंका के राजा थे। इसे पहले 700 ईसापूर्व श्रीलंका में 'मलेराज की कथा' की कथा सिंहली भाषा में जन-जन में प्रचलित रही, जो राम के जीवन से जुड़ी है।

6.शिव पद : श्रीलंका में एक पर्वत है जिसे श्रीपद चोटी भी कहा जाता है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान इसका नाम उन्होंने एडम पीक रख दिया था। हालांकि इस एडम पीक का पुराना नाम रतन द्वीप पहाड़ है। इस पहाड़ पर एक मंदिर बना है। हिन्दू मान्यता के अनुसार यहां देवों के देव महादेव शंकर के पैरों के निशान हैं इसीलिए इस स्थान को सिवानोलीपदम (शिव का प्रकाश) भी कहा जाता है। यह पदचिन्ह 5 फिट 7 इंच लंबे और 2 फिट 6 इंच चौड़ें हैं। यहां 2,224 मीटर की ऊंचाई पर स्‍थित इस 'श्रीपद' के दर्शन के लिए लाखों भक्त और सैलानी आते हैं। ईसाइयों ने इसके महत्व को समझते हुए यह प्रचारित कर दिया कि ये संत थॉमस के पैरों के चिह्न हैं। बौद्ध संप्रदाय के लोगों के अनुसार ये पद चिह्न गौतम बुद्ध के हैं। मुस्लिम संप्रदाय के लोगों के अनुसार पद चिह्न हजरत आदम के हैं। कुछ लोग तो रामसेतु को भी आदम पुल कहने लगे हैं। इस पहाड़ के बारे में कहा जाता है कि यह पहाड़ ही वह पहाड़ है, जो द्रोणागिरि का एक टुकड़ा था और जिसे उठाकर हनुमानजी ले गए थे। श्रीलंका के दक्षिणी तट गाले में एक बहुत रोमांचित करने वाले इस पहाड़ को श्रीलंकाई लोग रहुमाशाला कांडा कहते हैं।

7.रावण की गुफा : ऐसा माना जाता है कि रैगला के जंगलों के बीच एक विशालकाय पहाड़ी पर रावण की गुफा है, जहां उसने घोर तपस्या की थी। उसी गुफा में आज भी रावण का शव सुरक्षित रखा हुआ है। रैगला के इलाके में रावण की यह गुफा 8 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। जहां 17 फुट लंबे ताबूत में रखा है रावण का शव। इस ताबूत के चारों तरफ लगा है एक खास लेप जिसके कारण यह ताबूत हजारों सालों से जस का तस रखा हुआ है। श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है। रामसेतु के बारे में तो सभी लोग जानते ही हैं।

8.राम सेतु : राम सेतु को असल में नल सेतु कहा जाता है। भारत के दक्षिण में धनुषकोटि तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिम में पम्बन के मध्य समुद्र में 48 किमी चौड़ी पट्टी के रूप में उभरे एक भू-भाग को जब पहली बार नासा ने अपने उपग्रह से देखा तो इसे नाम दिया एडम सेतु। इस घटना के बाद श्रीलंका के मुस्लिमों ने इसे आदम पुल कहना प्रारंभ कर दिया। भगवान राम ने जहां धनुष मारा था उस स्थान को 'धनुषकोटि' कहते हैं। राम ने अपनी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई करने के लिए उक्त स्थान से समुद्र में एक ब्रिज बनाया था इसका उल्लेख 'वाल्मिकी रामायण' में मिलता है।

वाल्मीक रामायण में वर्णन मिलता है कि पुल लगभग पांच दिनों में बन गया जिसकी लम्बाई सौ योजन और चौड़ाई दस योजन थी। रामायण में इस पुल को ‘नल सेतु’ की संज्ञा दी गई है। नल के निरीक्षण में वानरों ने बहुत प्रयत्न पूर्वक इस सेतु का निर्माण किया था।

वाल्मीक रामायण में कई प्रमाण हैं कि सेतु बनाने में उच्च तकनीक प्रयोग किया गया था। कुछ वानर बड़े-बड़े पर्वतों को यन्त्रों के द्वारा समुद्रतट पर ले आए ते। कुछ वानर सौ योजन लम्बा सूत पकड़े हुए थे, अर्थात पुल का निर्माण सूत से सीध में हो रहा था।

9. रामायण काल के जनपद : महाभारत के काल में 16 महाजनपद होते थे। जैन पुराणों अनुसार 18 महाजनपद होते थे। राम के काल 5114 ईसा पूर्व में 9 प्रमुख महाजनपद थे जिसके अंतर्गत उपजनपद होते थे। ये 9 इस प्रकार हैं- 1.मगध, 2.अंग (बिहार), 3.अवन्ति (उज्जैन), 4.अनूप (नर्मदा तट पर महिष्मती), 5.सूरसेन (मथुरा), 6.धनीप (राजस्थान), 7.पांडय (तमिल), 8. विन्ध्य (मध्यप्रदेश) और 9.मलय (मलावार)। उक्त महाजनपदों के अंतर्गत ही कैकयी, कौशल, अवध, मिथिला आदि जनपद होते थे। इन्हीं महाजनपदों में खासकर अवध, कैकयी, कौशल, प्रयाग, चित्रकूट, जनकपुर (मिथिला), दण्डकारण्य, महाकान्तर, तालीमन्नार, किष्किन्धा, रामेश्वरम, लंका, कंपिल, नैमिषारण्य, गया, अवंतिका, शूरसेन (मथुरा), कम्बोज, कुशावती, दशार्ण (विदिशा), निषाद, काशी, पंचवटी, मलय आदि कई क्षेत्र प्रसिद्ध थे।

10. रामायण काल का भूगोल : सूर्यसिद्धांत और वाल्मिकी रामायण में रामायण काल के दौरा का भूगोल बताया गया है। इसमें आज की लंका से कई गुना बड़ी थी रामायण काल की लंका जिसमें लंका के पास के द्वीप भी शामिल थे। इसी तरह उस दौर में हिमालय के लगभग सभी देश और राज्य भी उक्त महाजनपदों के अंतर्गत ही आते थे।


    4
    0

    Comments

    • Thanks so much for giving everyone an exceptionally nice chance to discover important secrets from this web site. It is often very pleasant plus packed with fun for me personally and my office co-workers to visit your blog more than 3 times in a week to see the fresh items you have got. And indeed, I am usually motivated with the mind-blowing information you give. Certain two facts in this post are rather the most effective I have had. nike sb dunk low http://www.sbdunk.us

      Commented by :nike sb dunk low
      27-01-2021 05:48:33

    • I as well as my guys ended up studying the best ideas found on your web site and the sudden I had an awful suspicion I never thanked the site owner for those secrets. All of the young men happened to be so excited to see all of them and have surely been making the most of these things. Appreciation for turning out to be very kind and also for selecting these kinds of terrific guides millions of individuals are really desirous to learn about. My personal honest regret for not saying thanks to sooner. air jordans http://www.cheap-airjordans.us.com

      Commented by :air jordans
      27-01-2021 05:30:53

    • I would like to express some thanks to the writer just for rescuing me from this type of predicament. As a result of surfing through the the web and coming across thoughts which were not pleasant, I believed my life was well over. Living minus the approaches to the issues you've resolved through your short post is a crucial case, as well as the kind which might have negatively affected my entire career if I hadn't noticed the blog. Your actual skills and kindness in handling all the things was excellent. I am not sure what I would've done if I hadn't come upon such a subject like this. I can at this moment look ahead to my future. Thanks a lot so much for this skilled and results-oriented help. I will not think twice to suggest the website to any individual who wants and needs counselling about this matter. kyrie 7 shoes http://www.kyrie7.us

      Commented by :kyrie 7 shoes
      27-01-2021 00:41:17

    • My spouse and i felt delighted Jordan could finish up his basic research through your ideas he discovered using your web page. It's not at all simplistic to just always be giving freely concepts which people today may have been trying to sell. And now we keep in mind we now have you to be grateful to for this. The most important explanations you have made, the simple blog navigation, the friendships you can aid to engender - it is most exceptional, and it's facilitating our son and us imagine that the concept is pleasurable, and that is pretty pressing. Thanks for all the pieces! lebron 16 http://www.lebron16.us

      Commented by :lebron 16
      26-01-2021 05:20:22

    • I precisely wished to thank you very much once again. I am not sure the things I could possibly have worked on without the pointers shown by you directly on my industry. It became a real hard difficulty in my circumstances, but spending time with a new professional mode you dealt with the issue made me to leap over joy. Extremely thankful for this work and believe you really know what an amazing job that you are undertaking educating people thru your webpage. I'm certain you have never come across all of us. curry 6 http://www.curry6.net

      Commented by :curry 6
      26-01-2021 03:09:55

    • My spouse and i were absolutely comfortable when Jordan could finish off his investigations through the ideas he acquired out of your web pages. It's not at all simplistic to simply find yourself freely giving tactics some others might have been making money from. Therefore we recognize we have the writer to appreciate for this. The most important illustrations you have made, the easy site navigation, the relationships you can aid to instill - it is all sensational, and it is helping our son and our family believe that that article is excellent, and that is quite indispensable. Thanks for all the pieces! golden goose outlet http://www.goldengooseoutletstore.com

      Commented by :golden goose outlet
      26-01-2021 02:56:45

    • I and my friends were digesting the great secrets found on your site and unexpectedly developed a horrible feeling I never thanked the web site owner for those secrets. The boys are already totally happy to learn them and now have simply been loving those things. Thank you for being really thoughtful and for making a decision on these kinds of high-quality areas most people are really desperate to discover. My personal honest regret for not saying thanks to sooner. jordan shoes http://www.jordan4.us.com

      Commented by :jordan shoes
      25-01-2021 11:14:26

    • I wanted to post a brief note in order to say thanks to you for these unique steps you are posting at this site. My extensive internet research has at the end of the day been rewarded with sensible facts and techniques to write about with my company. I would state that that many of us site visitors actually are quite blessed to be in a very good community with many wonderful individuals with interesting methods. I feel truly blessed to have used your webpage and look forward to plenty of more entertaining times reading here. Thanks a lot once more for all the details. jordan shoes http://www.jordan6.us.com

      Commented by :jordan shoes
      25-01-2021 08:54:55

    • I precisely desired to thank you very much once more. I do not know the things that I would have created in the absence of these hints shared by you directly on my topic. This has been a real terrifying concern in my view, but witnessing this specialized approach you processed the issue made me to leap over happiness. I am happy for the information and then pray you know what a great job that you are accomplishing training the others all through your webpage. I am sure you've never come across all of us. jordan shoes http://www.jordanssneakers.us.com

      Commented by :jordan shoes
      24-01-2021 11:52:37

    • I just wanted to jot down a small remark to be able to say thanks to you for all the amazing tips you are placing at this site. My rather long internet research has now been honored with high-quality concept to write about with my great friends. I would state that that most of us readers are very endowed to dwell in a magnificent place with very many special professionals with useful suggestions. I feel somewhat blessed to have encountered the webpages and look forward to really more fun minutes reading here. Thanks again for everything. pandora http://www.pandora-jewelrys.us.com

      Commented by :pandora
      24-01-2021 02:07:18

    • I would like to show some thanks to this writer just for rescuing me from this particular scenario. Right after surfing throughout the the net and meeting strategies that were not productive, I was thinking my life was gone. Living minus the strategies to the problems you have resolved through the short article is a crucial case, as well as those that could have negatively damaged my career if I had not noticed your site. Your main competence and kindness in playing with every part was tremendous. I am not sure what I would've done if I hadn't come across such a solution like this. It's possible to at this moment look forward to my future. Thanks for your time so much for your professional and sensible guide. I will not hesitate to endorse the website to any individual who would need support on this matter. birkin bag http://www.birkinbag.us.com

      Commented by :birkin bag
      24-01-2021 01:50:13

    • I definitely wanted to write down a small word to express gratitude to you for some of the pleasant tricks you are giving out on this website. My time intensive internet look up has at the end been paid with beneficial insight to exchange with my visitors. I would express that most of us site visitors are quite blessed to live in a fabulous place with many lovely individuals with great tactics. I feel pretty lucky to have seen your webpages and look forward to plenty of more excellent times reading here. Thanks a lot once more for everything. off white jordan 1 http://www.offwhite.us.com

      Commented by :off white jordan 1
      23-01-2021 14:30:32

    • Thank you so much for giving everyone an extremely breathtaking possiblity to read from here. It's usually so nice and stuffed with fun for me personally and my office colleagues to search your website at the very least 3 times per week to read the new issues you will have. And definitely, we're always happy with all the striking hints you give. Some 3 points in this article are honestly the very best we have ever had. off white nike http://www.off-whiteshoes.us.com

      Commented by :off white nike
      23-01-2021 00:46:32

    • I simply wanted to compose a small comment in order to appreciate you for some of the remarkable guidelines you are giving on this site. My time-consuming internet search has at the end been rewarded with extremely good content to share with my classmates and friends. I 'd suppose that many of us site visitors actually are extremely endowed to exist in a superb place with very many lovely people with valuable tactics. I feel somewhat fortunate to have discovered the site and look forward to plenty of more fun moments reading here. Thanks a lot once again for all the details. yeezy wave runner 700 http://www.yeezy700.us.com

      Commented by :yeezy wave runner 700
      22-01-2021 20:02:23

    • Ok

      Commented by :Aslam
      31-12-2020 20:19:20

    • Good

      Commented by :Sirajuddin Ansari
      31-12-2020 09:53:35

    • Load More

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    advt_govt

    Trends

    Special Story