कविता - कुछ कह दे जुबां से अपनी

Medhaj News 31 Jul 20 , 23:04:15 Special Story Viewed : 10370 Times
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कुछ कह दे जुबां से अपनी ,

सांसो में  बसती है जिंदगी ;

बनके सफर का हमराही मै ,

मिल जाये दिल को सुकून ,

ऐसा संगदिल हमसफ़र ढूँढता हूँ |


जो सांसो में ,दिल के जज़्बातों में हो ,

जो रात की तन्हाइयो में भी साथ हो ,

ऐसा सपनो का हमसफ़र  ढूँढता हूँ |

चाहत नहीं है ऐसी मेरी जो पूरी ना  हो ,

जो अचेत मन में हलचल पैदा करदे ,


ऐसा हमदर्द संसार में  ढूँढता हूँ  |

जो शब्दो का ही नहीं भावनावो के ,

एहसास को भी जो दिल पढ़ सके,

ऐसा मै मुकाबिल संसार में ढूंढता हूँ |

जो टपकती आँखों की  आँसू में भी ,


उन आँसुओं
 के दर्द की गहराई समझे,

जल से भी निर्मल दिल जिसका ,

ऐसा सनम दिल संसार में ढूंढता हूँ |

जो ख्वाब बनके दिल के एहसासों में हो

जिसकी बस एक याद ही मुस्कान छेड़ दे ,


ऐसा सनम काबिल संसार में ढूंढता हूँ | 



-----अजय (H.O)------



मेरी पिछली कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें----> मेरे हाथ की लकीरें


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