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नदियों को जोड़ने की नहीं हमें नदियों से जुड़ने की जरूरत है- जल पुरुष राजेन्द्र सिंह

Medhaj News 15 Dec 20 , 08:15:51 Special Story Viewed : 1842 Times
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" जल बिन सब सून" :  एबी फाउंडेशन की ओर से आत्मनिर्भर भारत अभियान तथा भारतवर्ष को विश्व गुरु बनाने के अभियान के तहत " डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट ऑफ वाटर रिसोर्स " विषय पर  वेबीनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के सुप्रसिद्ध समाज सेवी एवं जल पुरुष की उपाधि से अलंकृत श्री राजेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि नदियों को जोड़ने की बजाय मनुष्य को नदियों से जुड़ने की आज ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत है तथा जल ही जीवन है । इसलिए कम से कम जल में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो यही है समय की मांग। उन्होंने जल के  सभी स्रोतों नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। लोग अपने समाज में विश्वास पैदा करें तथा जल को मार्केट फ्री कर दें इसकी जरूरत है। 

भारतीय जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने बताया कि वह कोई भूगर्भ विज्ञानी नहीं, कोई इन्जीनियर नही, जल संरक्षण के बारे मे ज्ञान शून्य था। मैं कुछ और करने की सोच रहा था। लेकिन पांच लाख की आबादी वाले अलवर में जलाया अवर्षण को लेकर चिन्ता थी। मिल गये मुझे एक गुरू जो अशिक्षित ग्रामीण थे मगर जिन्होंने एक दन मे मुझे दीक्षित कर दिया इस विषय मे और मैं इस काम मे लग गया। 





मैंगसे अवार्ड विजेता श्री सिंह ने बताया कि चार दशक के दौरान राजस्थान के लगभग ढाई लाख कूपों को रिचार्ज किया, 11800 जलस्रोतों को विकसित किया यानी नालों को स्वच्छ जल में बदला। इससे राजस्थान की लगभग 17 लाख आबादी लाभान्वित हुई है। इन गांवों मे अब  बिन बरसे जाते बादल देख कर महिलाएं उदास नहीं होती। बल्कि बादल के आगमन की प्रशंसा में गीत गाती हैं। आपको विश्वास नही होगा कि इनसे जुड़े इलाको में प्रकृति लोगों के साथ है और कोरोना महामारी इनको छू नहीं सकी। आप प्रकृति के साथ अन्याय कीजिए प्रकृति आपकी मदद के लिए सदैव तैयार रहेगी।प्रौद्योगिकरण की अंधी दौड़, भ्रष्टाचार के चलते हुए अतिक्रमण से उपजी समस्या वैश्विक है। 

राजेन्द्र सिंह ने वाराणसी में असी नदी के नाले में तब्दील होने पर चिन्ता जताने के साथ कहा कि इसको स्वच्छ करने के लिए जनान्दोलन की जरूरत है। 

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता के रूप में आईआईटी कानपुर से  एमटेक,  जल पर  शोधकर्ता एवं युवा उद्यमी श्री के हर्षा ने अपनी बात रखते हुए बताया कि मनुष्य को जहां ऊर्जा की गैर जरूरत खपत पर नियंत्रण रखना होगा,  दूसरी और गंगा तथा अन्य नदियों से समाहित हो रहे इंडस्ट्रियल कचरे पर लगाम लगानी होगी.म।  नदियों में प्लास्टिक को समाहित करने पर भी रोक लगानी होगी।। उन्होंने वाटर ट्रीटमेंट को चमड़ा उद्योग द्वारा अपने कॉस्ट में जोड़ने तथा इंप्लीमेंट करने की जरूरत बताया।  जल के स्रोत को किसी प्रकार की प्रदूषण से बचाना है इसकी प्राथमिकता सरकारों के द्वारा कानून के जरिए तय होनी चाहिए। उन्होंने अपने द्वारा बनाई गई  भारतवर्ष में  निर्मित  जल  स्तर बताने तथा  पोलूशन पर लगाम लगाने वाली मशीन के बारे में भी जानकारी दी। 

उन्होंने आज के युवाओं सेआह्वान किया कि वे अपनी कॉलोनियल सोच को बदलें तथा भारत की समस्याओं  के समाधान के ऊपर कार्य कर एक उद्यमी और सफल भारतीय बनकर देश एवं दुनिया में अपना नाम रोशन करें । कार्यक्रम में एबी फाउंडेशन के ट्रस्टी श्चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री सीके मिश्रा ने जहां इस वेबिनार्स को काफी महत्वपूर्ण बताया तथा फाउंडेशन के द्वारा अन्य कार्यक्रम 

 की जानकारी दी। श्री रवि पांडे एवं सुश्री अनिता चौधरी ने मॉडरेटर एवं को मॉडरेटर की भूमिका का सफल निर्वाह करते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जहां   महत्वपूर्ण  योगदान दिया वही संस्था के मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री पदम पति शर्मा काशी का महत्व एवं प्राचीन इतिहास बताते हुए  भाव विभोर हो गए।  उन्होंने वाराणसी को फिर से आनंदवन जैसा बनाने की आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जल में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सरकारों को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। 

अंत में संस्था के धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ताव में अधिवक्ता श्री आनंद कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी दी कि मनुष्य के शरीर में लगभग 60 से 65% पानी है. जिसमें की सबसे ज्यादा पानी मनुष्य के मस्तिष्क में लगभग 85% तक रहता है. इसी बात से समझने की जरूरत है कि जल कितना महत्वपूर्ण है उन्होंने सभी वक्ताओं , श्रोताओं को धन्यवाद अर्पण करते हुए देश के युवाओं को पानी के ऊपर जन आंदोलन करने और उसके ऊपर काम  करने पर जोर हुए इस वेबीनार को विराम दिया।



एबी फाउंडेशन : आत्मनिर्भर भारत अभियान में हैंडीक्राफ्ट और हथकरघा उद्योग की सार्थक भूमिका


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