कविता - जीवन बीत गया उसकी खोज में....

कविता - जीवन बीत गया उसकी खोज में....

जीवन बीत गया उसकी खोज में,

हमें तो बस एक दीदार की आश थी।

अब तो मौत के द्वार पर भी अधूरा आ पहुंचा,

मुझे तो बस एक बूंद कि प्यास थी।।


अगर फिर से लौटा तो ढूंढ लूंगा उसे,

वो भी तो इंतजार में होगा मेरे।

इस बार कहीं नहीं जाने दूंगा,

पूरा जीवन बिता दूंगा अश्क में तेरे।।


इसके बाद भी तो जाना होगा मुझे,

फिर क्या होगा मेरा तेरे बिना।

काश हम एक हो जाएं मिलन के बंधन से मुक्त,

ना मैं तेरे बिना ना तू मेरे बिना।।



----मिथिलेश कुमार सिंह-----


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