स्कंद षष्ठी

स्कंद षष्ठी

भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं।यह व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत (South India) के राज्यों में लोकप्रिय है।  दक्षिण भारत में इन्हें मुरुगन भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान मुरुगन की पूजा करते हैं। स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से भगवान कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था।

स्कंद षष्ठी शुभ मुहूर्त-

 16 जून 2021 दिन बुधवार को स्कन्द षष्ठी का व्रत किया जाएगा।

 ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि आरंभ- 15 जून 2021 दिन मंगलवार को रात्रि 10 बजकर 56 मिनट से

 ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि समाप्त- 16 जून 2021 दिन बुधवार को रात्रि 10 बजकर 45 मिनट पर

स्कंद षष्ठी महत्व:

 स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से जातक के जीवन में हर तरह की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं और व्रत रखने वालों को सुख और वैभव की प्राप्ति होती है।  साथ ही संतान के कष्टों को कम करने और उसके सुख की कामना से ये व्रत किया जाता है।

स्कंद षष्ठी पूजा विधि

सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प ले। भगवान् कार्तिके के साथ माँ गौरी और भगवान् शिव की मूर्ति को भी स्थापित करें। पूजा जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र से करें। .आरती करके पूरे दिन व्रत करें। शाम को आरती करने के बाद फलाहार खाये।

स्कंद षष्ठी की कथा:

जब भगवान् शिव सती के विलाप में तपस्या करने लगे तब तारकासुर नमक दानव सृष्टि पे हाहाकार मचने लगता है।  तब सभी ब्रह्मा जी के पास जाते है।  ब्रह्मा जी बताते हैं के तारकासुर का वध शिव पुत्र करेंगे।  भगवान् शंकर और माँ पार्वती के विवाह के बाद कार्तिकेय का जन्म होता है। कार्तिकेय तारकासुर का वध करके देवों को उनका स्थान प्रदान करते हैं।

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