शनिदेव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल ?

shanidev

शनिदेव को सूर्य पुत्र एवं कर्मफल दाता माना जाता है। शनि न्याय के देवता हैं जो इंसानो को उनके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनि का ग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान होता है ककीकी उनके पिता सूर्य और माता छाया हैं। अकसर देखा गया है कि शनिवार के दिन शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है और सरसों के तेल का ही दीपक भी जलाया जाता है. तेल और शनि के बीच क्या संबंध है? 

पहली कथा का संबंध है रावण से 

रावण ने जब सीता माँ का हरण किया था।  तब हनुमान जी लंका गए थे। रावण ने वहा सभी ग्रहों को कैद करके रखा हुआ था। और शनिदेव को भी उल्टा लटकाया हुआ था।  हनुमानजी जब लंका जलाते हैं। तो केवल विभीषण के महल को छोड़कर पूरी लंका जल जाती है जिससे सभी ग्रह वहां से निकल जाते है।  उल्टा लटकने के कारण शनि देव नहीं निकल पाते और उनको पीड़ा होती है तब बजरंगबली ने उनकी पीड़ा कम करने के लिए तेल लगाया था। तबसे शनि देव ने कहा के जो भी भक्त उनको तेल चढ़ाएगा उनकी सारी मनोकामना पूरी होगी। 

दूसरी कथा का सम्बन्ध युद्ध से 

शनि देव को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था।  इसी घमंड में शनि देव ने हनुमानजी से युद्ध करने की सोची। शनि देव हनुमान जी को पराजित कर ये साबित करना चाहते थे कि उनसे अधिक शक्तिशाली तीनों लोकों में कोई नहीं है। जब शनि देव,  हनुमान जी के पास गए तो हनुमानजी एक शांत स्थान पर बैठकर  श्रीराम की भक्ति में लीन थे। शनिदेव हनुमान जी से मिलते ही उनको युद्ध करने के लिए ललकारने लगे। रामजी के परम भक्त हनुमानजी ने शनिदेव को बहुत समझाया और युद्ध के लिए तैयार नहीं हुए। लेकिन शनिदेव तो अहंकार के मद में चूर थे उन्होंने हनुमान जी की एक न सुनी और युद्ध करने की ठान ली। बजरंगबली के कई बार मना करने पर भी शनिदेव नहीं माने तो पवन पुत्र हनुमानजी और शनिदेव के बीच घमासान युद्ध शुरू हो गया। लड़ते-लड़ते शनिदेव बुरी तरह हारकर घायल हो गए और उनके शरीर में भयंकर पीड़ा होने लगी। तब हनुमान जी उनकी पीड़ा को तेल लगाकर कम किया। तब से  शनि देव पर तेल चढ़ाया जाता हैं। 

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