Headline


आइए जानते हैं छठी मैया को खुश करने के लिए कौन सी हैं वो चार चीजें

Medhaj News 1 Nov 19 , 06:01:39 Sports Viewed : 9 Times
chhath_puja_bihar.jpg

लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ 31 अक्टूबर से ही शुरू हो गया है | देश के कई हिस्सों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है | इस व्रत में नदी या तालाब में जाकर डूबकी लगाकर सूर्य भगवान की उपासना की जाती है | साथ ही प्रसाद में मौसमी फल, सब्जियां और अनाज का उपयोग किया जाता है | आज व्रती छठ का दूसरा दिन खरना कर रहे हैं | छठी मैया को खुश करने के लिए आज हर व्रती प्रसाद में चार चीजें जरूर रखता है। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो चीजें | छठ के दूसरे दिन खरना होता है | इस दिन व्रती सुबह से निर्जला व्रत रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर बनाती है |  खीर के साथ रोटी भी बनती है | रोटी और खीर को मौसमी फल (जिसमें केला जरूर शामिल किया जाता है) और मिठाई के साथ एक केले के पत्ते पर रखकर छठ माता को चढ़ाया जाता है | इसके बाद व्रती खुद भी इस प्रसाद को ग्रहण करके परिवार के बाकी लोगों को भी प्रसाद बांटती है |





आपको बता दें कि यह प्रसाद चूल्हें पर आम की लकड़ियों को जलाकर ही बनाया जाता है | सूर्य उपासना का यह लोकपर्व छठ 4 दिनों तक मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है | उसके अगले दिन खरना किया जाता है | खरना का मतलब होता है शुद्धिकरण | दरअसल, छठ का व्रत करने वाले व्रती नहाय खाय के दिन पूरा दिन उपवास रखकर केवल एक ही समय भोजन करके अपने शरीर से लेकर मन तक को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं | इसकी पूर्णता अगले दिन समाप्त होती है | यही वजह है कि इसे खरना के नाम से बुलाया जाता है | इस दिन व्रती साफ मन से अपने कुलदेवता और छठ मैया की पूजा करके उन्हें गुड़ से बनी खीर का प्रसाद चढ़ाते हैं | आज के दिन शाम होने पर गन्ने का जूस, गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बनाकर बांटा जाता है | प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है | खरना के दिन जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है और ये चूल्‍हा मिट्टी का बना होता है |  चूल्‍हे पर आम की लकड़ी का प्रयोग करना शुभ माना जाता है | खरना इसलिए भी खास है क्‍योंकि इस दिन जब व्रती प्रसाद खा लेती हैं तो फिर वे छठ पूजने के बाद ही कुछ खाती हैं | खरना के बाद आसपास के लोग भी व्रतियों के घर पहुंचते हैं और मांगकर प्रसाद ग्रहण करते हैं | आपको बता दें कि इस प्रसाद के लिए लोगों को बुलाया नहीं जाता बल्कि लोग खुद व्रती के घर पहुंचते हैं |


    0
    0

    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story