आत्मनिर्भर भारत - इस बार IPL का सूरत से है सीधा कनेक्शन

Medhaj News 22 Sep 20 , 16:38:38 Sports Viewed : 1090 Times
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इस बार का आईपीएल हर बार से अलग है। एक तो इस बार आईपीएल कोरोना के बीच हो रहा है, दूसरा आईपीएल के खिलाड़ियों की जर्सी का फैब्रिक चीन से नहीं आ रहा, बल्कि गुजरात के सूरत में बन रहा है। यानी आत्मनिर्भर भारत मिशन पर अमल हो रहा है। आईपीएल का गुजरात के सूरत के साथ एक बड़ा कनेक्शन सामने आया है। ऐसा कनेक्शन जो हर गुजराती के खुशी से झूमने के लिए काफी है। दरअसल, आईपीएल की टीमों ने जो जर्सी पहनी है, उसका कपड़ा सूरत में मैन्युफैक्चर हुआ है। भारत की ओर से चीन के तमाम प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने के बाद चीन से कपड़ा आना भी बहुत ही कम हो गया। पहले जो आयात करीब 800 टन का होता था, अब वह मज 200 टन तक सिमट गया है। ऐसे में सूरत के कपड़ा मैन्युफैक्चरर्स ने इस मौके को भुनाना शुरू कर दिया है।

निटवीयर इंडस्ट्री में शानदार प्रोडक्शन - यूं तो इस दौरान टेक्सटाइल इंडस्ट्री में प्रोडक्शन करीब 50 फीसदी कम हो रहा है, लेकिन इसके निटवीयर सेक्टर यानी बुनवाई वाले सेक्टर में 80 फीसदी प्रोडक्शन हो रहा है और इसका पूरा श्रेय जाता है सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को। बता दें कि जो जर्सी खिलाड़ी पहन रहे हैं वह बुनाई वाली यानी निटवीयर ही हैं। सर्कुलर निटिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बिष्णुराम अग्रवाल कहते हैं कि एक ही मशीन रोजाना करीब 150 किलो तक फैब्रिक बना सकती है और इससे कुल मिलाकर 4.5 लाख किलो तक का प्रोडक्शन किया जा सकता है। पहले पूरे सूरत में सिर्फ 2-3 ही मिल थीं, जो निटवीयर से जुड़ी थीं, लेकिन अभी पूरे सूरत में करीब 30 मिल हैं।

कोलकाता-तिरुपुर को सूरत ने पछाड़ा - अभी तक कॉटन की निटवीयर इंडस्ट्री की बात होती थी तो कोलकाता और तिरुपुर का नाम पहले आता था। सूरत में निटवीयर की इंडस्ट्री 20 साल पहले लगी थी और पिछले 8 सालों से अपग्रेडेशन में थी। अभी तक सर्कुलर निटवीयर की मांग सिर्फ कॉटन फैब्रिक में होती थी, लेकिन अब इसकी मांग पॉलिएस्टर फैब्रिक में हो रही है। इस फैब्रिक की वजह से कपड़ा जल्दी सूखता है और वजन में भी हल्का होता है।

महज 50 पैसे प्रति मीटर है लेबर कॉस्ट - सूरत की निटवीयर इंडस्ट्री के लोगों ने बताया कि सूरत में करीब 150 मैन्युफैक्चरर हैं, जिनके पास लगभग 3000 मशीनें हैं। इस फैब्रिक को बनाने की लेबर कॉस्ट सिर्फ 50 पैसे प्रति मीटर आती है। उन्होंने बताया कि बाजार में इस फैब्रिक की मांग काफी अधिक है। इस फैब्रिक की अधिक मांग इसके कई जगह इस्तेमाल होने की वजह से है। इसका इस्तेमाल जूते बनाने, सूटकेस बनाने में, बेबी फ्रॉक बनाने में, स्वीमिंग कॉस्ट्यूम बनाने में, लेगिंग्स बनाने के लिए और टीशर्ट बनाने में होता है।


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