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महाभारत के भीम की कहानी

महाभारत की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के सखा और पांडवों के भाई, भीम की महत्वपूर्ण भूमिका है। भीम पांडु और कुंती के पुत्र थे ।

भीम का जन्म वायु देव और कुंती के पुत्र के रूप में हुआ था। वायु देव ने कुंती को एक वरदान दिया था कि वह किसी भी वक्त उनके पास आकर उन्हें बुला सकती हैं, और कुंती ने यह वरदान भीम के जन्म के लिए प्रयोग किया।

भीम को शक्ति और बल का अत्यधिक वरदान मिला था। उनकी विशेष पहचान उनकी अद्भुत शारीरिक शक्तियों में थी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए थे।

भीम का एक महत्वपूर्ण कार्य महाभारत के युद्ध में हुआ था। उन्होंने भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में दुर्योधन के भ दुराचार का नाश किया और धर्म की रक्षा की।

भीम का विवाह हिडिम्बा से हुआ था और उनके इस विवाह से गटोत्कच जैसे महान योद्धा का जन्म हुआ था।

भीम के प्रति उनके बड़े भाई युधिष्ठिर का विशेष स्नेह था। भीम की शक्ति, उनकी वीरता, और उनके भक्ति भाव के कारण उनके समर्थन में अपने बड़े भाई युधिष्ठिर ने हमेशा भरोसा किया।

महाभारत युद्ध में भीम ने दुर्योधन के साथ युद्ध किया और उनके द्वारा दिए गए विशेष वध का निर्वाह किया, जिससे धर्म की जीत हुई।

भीम की कथा महाभारत में उनकी वीरता, शक्ति और भक्ति के प्रतीक रूप में प्रस्तुत होती है, जो उन्हें एक महान योद्धा और भगवान कृष्ण के सखा के रूप में याद किया जाता है।

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