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लहुलुहान सपने लिए मौत के भवँर में जा रहे छात्र

शैक्षिकण नगरी कोटा में आपका स्वागत है ,ये कोटा है, यहां किराए पर कमरे ही नहीं, किराए पर ख्वाब भी मिलते हैं, आपने हादसा फिल्म का गाना जो अमित कुमार ने गाया है सुना होगा ये मुंबई शहर हादसों का शहर है , दूसरा आनंद फिल्म का संवाद , बाबू मोशाय मौत तू एक कविता है , अगर दोनों को मिला दो तो शैक्षिणक नगरी कोटा के लिए लिए संवाद बनेगा कोटा शहर मौत की कविता है। हर हफ्ते एक बच्चा मौत के आगोश में चला जाता है , कुछ दिन उसका कमरा बंद रहता है। फिर धो-पोंछकर किसी नए बच्चे को दे दिया जाता हैं, हर कोई मिलकर मौत की गंध मिटाने में लगा हुआ है । ख्याल कोटा की हवा में झूलती वो अदृश्य तलवार है, जो कभी भी, किसी का भी गला काट सकती है।

हर साल कितने ही स्टूडेंट्स लहुलुहान सपने लिए मौत के भवँर में चले जाते हैं , दबाव ही इतना है , कोटा में ज्यादातर कोचिंग संस्थान कुछ खास जगहों पर सिमटे हुए हैं, इसी साल..मई-जून में 9 बच्चों ने सुसाइड कर लिया, अब जुलाई का महीना भी बेदाग नहीं रहा. देश को डॉक्टर-इंजीनियर देने वाले शहर में ऐसा क्या है????0

80 के दशक में कोटा इंस्टिट्यूट का एक बच्चा IIT पास हुआ था। उसके बाद यह शहर मशहूर हो गया। फाइव-स्टार होटल को पीछे छोड़ते हॉस्टल का लाउंज. लंबा-चौड़ा रिसेप्शन. बड़े-बड़े झूमर और बैठने के लिए आला दर्जे की टेबल-कुर्सियां. वहां के मालिक सारे बंदोबस्त दिखाते हैं, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक, इमारत के हर कोने में मजबूत जालियों का घेरा। पूछने पर गर्व से कहते हैं- अजी, हमने पूरा ख्याल रखा हैं।

अब कोटा शहर बारूद के ढेर पर बसा है, एक चिंगारी और सारी चमक-दमक राख हो जाएगी, इमारतें डिब्बा बन जाएंगी, मुर्दा बचपन की कीमत पर जिंदा है ये शहर। लखनऊ से करीब ६५० किलोमटेर दूर है यह शहर , करीब बारह घंटे की यात्रा।

कोटा के  कई लोग टॉप कोचिंग सेंटर में कम में सीट दिलाने का भरोसा देते हैं । जब मैं एक ड्राइवर से मिला कि मुझे ले चलो तो वह बोला श्रीमान अपना काम छोड़कर बच्चे के साथ यहां रह सकते हो तो दाखिला कराना ।

EK ARYA

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