मनोरंजनहास्य

वाट्सअप् का बहोत आभारी हूँ?

वाट्सअप् का बहोत आभारी हूँ?

क्योंकि निकम्में लोग तो आजकल बिजी हो गए?

लेकिन बड़े बड़े सेठ लोग को तो निकम्मा बना दिया?

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पंडित जी ने बहुत अच्छी सबको कथा सुनाई,

कथा का सार था कि इंसान को कभी किसी वस्तु का घमंड नही करना चाहिए ।

इंसान अपने साथ कुछ नही ले जा सकता..

कथा जैसे ही समाप्त हुई उसके बाद.. पंडित जी सब कुछ साथ लेकर गए

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वो हमारी चाँद और हम भी उसके चन्द्रयान हुआ करते थे

मैने भी उनके काफी सारे चक्कर लगाये थे

लेकिन एक दिन उसके बाप ने मेरे पर Hard landing अपलोड कर दिया.

और उस दिन से मेरा सम्पर्क ही टूट गया ?

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पुलिस वाला गाड़ी वाले से :- तुम्हारे सारे काग़ज़ात बगैरा सब ठीक हैं, लेकिन फिर भी तुम्हारा 500 रूपये का फाइन लगेगा ।

गाड़ी वाला :- अरे साहब जी जब सब कागज मेरे ठीक हैं फिर 500 फाईन किस बात का है?

पुलिस वाला :- देख भाई तूने सारे कागज बेशक संभाल के रखे है पर जिस पॉलीथिन में ये रखे है

वो फ़िलहाल अभी पालीथीन बैन हैं

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एक बच्चा अपने बाप से बोला कि आज मेरे पास इतना सारे पैसा है कि

मै खड़े-खड़े उन पैसो से चुटकियों में 5-6 बिस्कुट के पैकेट खरीद सकता हूँ.

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लड़का-लड़की से :- सुनो मेरी जान अगर रात में आपको मच्छर काटे तो क्या करना चाहिएl

लड़की-लड़के से :- चुपचाप से सो जाना चाहिए क्योंकि तू रोबोट फ़िल्म का कोई रजनीकांत तो है

नहीं जो मच्छर को पकड़ के उससे सॉरी बुलवायेगा.

————————————————————————–AR

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