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चमत्कारों का साक्षी हाथरस जनपद का प्राचीन मां भद्रकाली का मंदिर

उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद में सहपऊ कस्बे में स्थित प्राचीन मातेश्वरी भद्रकाली मंदिर एक ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है और श्रीमद्भागवत में भी इसका उल्लेख है। लोग यहां आकर भद्रकाली माता की पूजा अर्चना करते हैं और उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा और जलेसर के मध्य स्थित कराया इस मंदिर का निर्माण 

मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा और जलेसर के मध्य स्थित कराया था और यहां योगमाया को प्रकट करके उनकी पूजा-अर्चना की थी। मुगल काल में यह मंदिर भी औरंगजेब के क्रोध का शिकार बन गया था। उस समय इस मंदिर के मूर्तियों को तोड़कर उन्हें अपने साथ ले जाया गया था। बाद में जब खुदाई की गई तो पत्थरों के रूप में पुनः प्रकट हुए। इन पत्थरों को यहां के ग्रामीणों ने एक स्थान पर संग्रहीत किया और मंदिर का निर्माण किया।

श्राप के कारण उस बारात के सभी सदस्य पत्थरों में बदल गए

नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेला लगता है और भंडारा करने वालों की भीड़ लगती है। एक कथा के अनुसार, एक पंडित की लड़की की बारात यहां आई थी और कुछ लोगों ने उसे व्यंग किया था। उसके श्राप के कारण उस बारात के सभी सदस्य पत्थरों में बदल गए। बाद में खुदाई के दौरान इन पत्थरों को खोजा गया और उन्हें मंदिर में रखा गया जो आज भी वहां प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मां भद्रकाली का 500 साल पुराना मंदिर पांडवों में सहदेव के नाम पर रखा गया नाम 

मां भद्रकाली का यह मंदिर करीब 500 साल पुराना माना जाता है। पुराने समय में इस कस्बे का नाम पांचों पांडवों में सहदेव के नाम पर रखा गया था। मां भद्रकाली के मंदिर में भक्तों की आस्था और विश्वास को देखते हुए मंदिर को विशाल भवन में बदला गया। इस मंदिर के दरबार में भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वे शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस स्थान के चारों ओर से भारत के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त इसे दर्शन करने आते हैं।

read more… हाथरस किला जनपद हाथरस में एक महत्वपूर्ण पौराणिक स्थल

 

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