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31 साल पहले की वो घटना जिसने पूरे देश को हिला दिया, विरोध के लिए सड़को में उतरे थे, हजारो लोग

1992 की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आयी थी, ये वो इतिहास हैं, जो 31 साल पहले बीत चूका हैं ,लेकिन आज तक इसे कोई भी नहीं भुला पाया हैं, अजमेर में हुई इस घटना ने सभी को शर्मशार और हैरान कर दिया था , इस घटना के बारे में आप उतना ही जानते हैं, जितना आपने पढ़ा या सुना है, लेकिन 1992 में आखिर क्या हुआ था? इसकी हकीकत हम आपको बताते हैं.. इस घटना ने हजारो लोग को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था। तो आइए जानते हैं आखिर 31 साल पहले क्या हुआ था।

अजमेर में 250 से अधिक स्कूल में पढ़ रही छात्राओं का हुआ बलात्कार और गैंगरेप 

आपने अजमेर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के बार में सुना होगा, जो बहुत ही प्रसिद्ध हैं, लेकिन साल 1992 में यहां पर बहुत कुछ गलत चल रहा था, बताया जाता हैं कि 1987 और 1992 के बीच राजस्थान के अजमेर में लगभग 250 स्कूल में पढ़ रही छात्राओं का बलात्कार और गैंगरेप हुआ था, जिसके बाद ये शहर घिनौने अपराध के मामले में चर्चा का विषय बन गया था। बताया जाता हैं कि, अजमेर के कुछ प्रभावशाली और शक्तिशाली लोगों द्वारा स्कूल में पढ़ रही छात्राओं को ब्लैकमेल करके उनका गैंगरेप किया गया था। इनमें से कई छत्राओ ने तो आत्महत्या तक कर ली थी, इन घटनाओ ने इंसानियत को तार-तार कर दिया था।

छात्राओं ने परेशान होकर की आत्महत्या

छात्राओ के द्वारा मना करने पर आरोपी उन्हें उनकी नग्न तस्वीरें वायरल करने की धमकी देते थे, आप सोच सकते हैं कि, 31 साल पहले ये कितनी बड़ी बात ‘रही होगी क्योंकि, उस समय लोगो के विचार आज की तरह खुले नहीं थे, उस समय किसी की भी नग्न तस्वीर वायरल होना बहुत बड़ी बात थी, लोगो का नजिरया भी काफी पुराना हुआ करता था, लोक – समाज और तस्वीर वायरल होने के डर से कुछ छात्राओं को मजबूरन उनकी बात माननी पड़ी, कुछ स्कूल की छात्राओं ने तो इन सब से परेशान होकर आत्महत्या तक कर ली थी, और ना जाने कितनो को तो इन दरिंदो ने ही मौत के घाट उतारा होगा। इस घटना के ज्यादातर आरोपी मुस्लिम और पीड़ित हिंदू बताए गए थे। ये खबर सामने आने के बाद लोगों ने इसका जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया, इसको लेकर राजस्थान के हज़ारो लोग सड़कों पर उतर आए थे।

ज्यादातर 11 से 20 साल तक की हुआ करती थी लड़कियों की उम्र

medhaj news
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जिन स्कूली बच्चियों के साथ ये वाक्या हुआ उन्होंने बताया कि ये लोग काफी प्रभावशाली और शक्तिशाली थे, ये उन्हें फार्महाउस पर बुलाते थे और बलात्कार करते थे। बताया जाता हैं कि इन सब के पीछे असल में एक गिरोह था, जो लड़कियों को ब्लैकमेल करके उन्हें नग्न तस्वीरें लीक करने की धमकी देता था। ये सब चीज़े बड़े जोर शोर से अजमेर में चल रही थी, लेकिन हैरान कर देने वाली बात ये थी कि इस चीज़ की खबर किसी के कानों तक नहीं पड़ी। ये मामले केवल छोटे -मोटे स्कूलो के नहीं बल्कि ये मामले ज्यादातर अजमेर के जाने-माने प्राइवेट स्कूलो के थे। जहां आईएएस और आईपीएस की बच्चियां भी पढ़ा करती थीं। जिन लड़कियों को ब्लैकमेल किया जाता था, उनकी उम्र ज्यादातर 11 से 20 साल तक की हुआ करती थी। ये लोग लड़कियों को गाड़ियां के सहारे फार्महाउस भेजते थे, और उनके साथ रेप करके उनकी तस्वीरें लेते थे, इस बात को किसी को ना बताने के लिए ये उन्हें मौत के घाट उतारने की धमकी देते थे।

पत्रकार संतोष गुप्ता ने खबर ना छापी होती तो, शायद ही इस मामले के बारे किसी को पता चलता

इस गैंगरेप के बारे अगर पत्रकार संतोष गुप्ता ने खबर ना छापी होती तो,शायद ही किसी को इस मामले के बारे में पता चलता या हमें या आपको सुनाई देता, पत्रकार संतोष गुप्ता ने इस रिपोर्ट में राजनीतिक, सामाजिक और बड़े ओहदे पर बैठे लोग के द्वारा शहर में गंदगी फैलाने को लेकर सच बताया था उन्होंने बताया कि कैसे ये लोग स्कूल-कॉलेजों में पढ़ रही मासूम बच्चियों को ब्लैकमेल कर के अपना शिकार बनाते हैं।

अपराध की जानकारी पुलिस और प्रशासन दोनो को थी लेकिन शहर में दंगे का था डर

सूत्रों के मुताबिक इस गंदे अपराध की जानकारी पुलिस और प्रशासन दोनो को ही थी, लेकिन वह इस डर में थे कि, कहीं शहर में दंगे न हो जाए, लेकिन लोगो के भारी विरोध के कारण अंत में जीत अच्छे की हुई और आरोपियों को जेल में डाल दिया गया। वैसे अजमेर कांड में कई बड़े नाम सामने आए। लेकिन इसका मुख्य दोषी फारुक चिश्ती को बताया गया, जो धार्मिक तथ्यों से लेकर राजनैतिक तक काफी पावरफुल था, जिसने पहले स्कूल की लड़की को फंसाया था।

किसी आरोपी ने की सुसाइड तो कोई हुआ दिमागी रूप से पागल

साल 1994 में इन आरोपियों में से एक पुरुषोत्तम नाम के आदमी ने जेल से रिहा होने के बाद सुसाइड कर ली थी, फारुक के आलावा नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती भी इस काण्ड के मुख्य आरोपी थे, इस दौरान और अन्य 8 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से साल 2001 में अजमेर कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी कर दिया था। उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जिसके बाद अदालत ने बाकि बचे चारों दोषियों की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया गया। फारूक चिश्ती ने खुद को दिमागी रूप से पागल बताया। जिस कारण उसे भी साल 2012 तक जेल से जमानत पर बाहर भेज दिया गया।

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