मनोरंजनकवितायें और कहानियाँ

प्यार भरी ये मुलाकात

प्यार भरी ये मुलाकात,
और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है,
जब मेरी बाहों के दरम्यां,
तू बेपरवाह होकर के हँसती है;

किसी साज और श्रृंगार की,
बिल्कुल जरूरत नहीं है तुझे,
मुझे तो तू बिना किसी बनावट के,
नैसर्गिकता में ही जँचती है;

तेरे नज़रों की पाकीज़गी से,
तेरे चेहरे की रंगत और खिलती है,
हिचकिचाहट तेरे लबों पर, तेरे
मर्यादित होने की गवाही भरती है;

उलझती हुई उंगलियाँ हाथों की,
तेरे मन की चुगली करती हैं,
तेरे प्रेम में परिपूर्ण होकर ही,
मेरी जिंदगी और निखरती है;

तेरी खुशियों में ही शामिल है ,
मेरी भी मुस्कुराहटें सारीं,
आखिर तेरे अस्तित्व से ही तो,
मेरे जीवन की बगिया महकती है;

तू लहूँ की तरह, मेरे रगों से,
मेरी धड़कनों से हर पल गुजरती है,
स्वांस लेना भी तुझ बिन बेमानी सा है,
मेरे मन मंदिर में तू ही सजती है।

★★★★★
—(Copyright@भावना मौर्य “तरंगिणी”)—

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