क्राइम

तिहरे हत्याकांड: खून की होली, बचपन से शुरुआत

आज सांसद राजकुमार चाहर के पैतृक गांव गढ़ी कालिया में हुए तिहरे हत्याकांड के विषय में चर्चा होगी। इस घटना में तीनों भाइयों ने अपने पिता और दो भाइयों को खूनी खेल से नहीं बचाया। हम इस घटना को एक विस्तृत दृश्य के रूप में समझेंगे, ताकि हमारी जानकारी सटीक और पूर्ण हो सके।

खूनखराबा की साजिश

वारदात के अब तक के विवरण के अनुसार, खूनखराबा की साजिश पहले से ही रच रखी गई थी। तीनों भाइयों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। यह विवाद इतना तेजी से बढ़ता गया कि उन्होंने पिता और दो भाइयों को कुल्हाड़ी और तलवारों से मार डाला।

बंटवारे की घटना की सच्चाई 

घटना के वक्त घर में केवल एक महिला, आरती, मौजूद थी। वह देखकर कांप गई और डर से छिपकर कमरे में चली गई। उसने अपने पिता और दो भाइयों की मौत का सामना किया। वारदात के बाद उसने बहादुरी दिखाते हुए 112 नंबर पर सूचना दी। पुलिस पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

घटना का असर गांववालों पर

तिहरे हत्याकांड के बाद गांववालों पर बड़ा असर पड़ा। सभी लोग चिंतित हो गए और इस घटना की वजह से गांव में सन्नाटा छा गया। इस घटना के बारे में लोगों के बीच में विस्तार से चर्चा हो रही है।

बचपन से शुरुआत तक की कहानी

पांचों भाइयों का बचपन इस घर में खेलते-कूदते बीता था। राजकुमार चाहर ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिन बेटों में आपस में कभी इतना प्रेम था, वे एक दूसरे की जान के दुश्मन बन जाएंगे। यहां तक कि पिता ने अपने दो सगे भाइयों को अपनी देखभाल के लिए ढाई बीघा जमीन रखी थी, लेकिन तीन भाइयों ने इसे लालच में भूलकर पिता की हत्या कर दी।

समाप्ति

तिहरे हत्याकांड की घटना ने गांव को कायरता और नादानी की नकारात्मक शिक्षा दी। हम सभी को इस भयानक घटना से सीखना चाहिए कि अपने परिवार के सदस्यों के साथ सम्मानपूर्वक और प्यार से बिताना हमारा धरोहर है। हमें समझना चाहिए कि धन और संपत्ति की खातिर हमे अपने परिवार को नहीं खोने चाहते हैं। यह भावना हमें एक साथ रहने में समर्थ बनाए रखेगी और हम खुशहाल जीवन जी सकेंगे।

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